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कनाडा में भारतीयों पर बढ़ी कार्रवाई, 2026 के पहले 6 महीनों में 3,323 नागरिक डिपोर्ट

Canada deportation of Indians: कनाडा ने 2026 के पहले छह महीनों में 3,323 भारतीय नागरिकों को देश से डिपोर्ट किया है। जनवरी से जून के बीच हुई यह कार्रवाई पूरे 2025 में डिपोर्ट किए गए 3,779 भारतीयों की संख्या का करीब 88% है। मौजूदा रफ्तार जारी रही तो 2026 कम से कम पिछले छह वर्षों में भारतीयों के डिपोर्टेशन का सबसे बड़ा साल बन सकता है।

आंकड़ों के मुताबिक, 2021 में 603, 2022 में 786, 2023 में 1,132 और 2024 में 2,004 भारतीयों को कनाडा से हटाया गया था। यानी 2026 के सिर्फ छह महीनों में 2021 से 2024 के किसी भी पूरे साल से ज्यादा भारतीय डिपोर्ट हो चुके हैं। इस साल कनाडा से सबसे ज्यादा डिपोर्ट किए जाने वाली राष्ट्रीयता भी भारत बन गई है। जनवरी-जून में 1,573 मैक्सिकन नागरिकों के मुकाबले 3,323 भारतीयों को हटाया गया। इससे पहले लगातार पांच वर्षों तक मेक्सिको इस सूची में शीर्ष पर था और भारत दूसरे स्थान पर। भारत आखिरी बार 2020 में पहले स्थान पर था, जब 1,424 भारतीय डिपोर्ट हुए थे।

किन वजहों से हो रहा डिपोर्टेशन?

भारतीय नागरिकों को वीजा अवधि खत्म होने के बाद रुकने, शरणार्थी या असाइलम आवेदन खारिज होने, इमिग्रेशन नियमों का पालन न करने और वीजा फ्रॉड जैसे मामलों में कनाडा से हटाया जा सकता है। कनाडा बॉर्डर सर्विसेज एजेंसी (CBSA) कारणों का अलग-अलग डेटा रखती है, लेकिन इन्हें राष्ट्रीयता के आधार पर नहीं बताती। यह बढ़ोतरी कनाडा की इमिग्रेशन नीति में बड़े बदलावों के बीच हुई है। सरकार अस्थायी निवासियों की संख्या घटा रही है, स्टडी परमिट के नियम सख्त कर रही है और आवेदनों की ज्यादा जांच कर रही है।

7,669 भारतीयों का रिमूवल अभी लंबित

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, कनाडा में 'removal in progress' सूची में 7,669 भारतीय हैं, जो किसी भी राष्ट्रीयता के मुकाबले सबसे ज्यादा हैं। इससे संकेत मिलता है कि डिपोर्टेशन का आंकड़ा अभी और बढ़ सकता है। कनाडा में तीन प्रमुख तरह के रिमूवल ऑर्डर हैं। Departure Order में व्यक्ति को 30 दिनों के भीतर स्वेच्छा से देश छोड़ना होता है, वरना यह डिपोर्टेशन ऑर्डर में बदल सकता है। Exclusion Order के तहत आमतौर पर 1 से 5 साल तक वापसी पर रोक रहती है। वहीं Deportation Order दोबारा प्रवेश पर स्थायी रोक लगाता है, जब तक कनाडाई सरकार लिखित अनुमति न दे।

अमेरिका से भी ज्यादा भारतीय डिपोर्ट

अमेरिका की तुलना में भी कनाडा का आंकड़ा बड़ा है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, 1 जनवरी से 22 जुलाई 2026 के बीच अमेरिका से 1,273 भारतीय नागरिक डिपोर्ट किए गए। वहीं कनाडा ने सिर्फ छह महीनों में इसका ढाई गुना से ज्यादा आंकड़ा दर्ज किया।

भारतीय छात्रों के बीच घट रहा 'कनाडा ड्रीम'

डिपोर्टेशन बढ़ने के साथ कनाडा में भारतीय छात्रों की संख्या भी तेजी से घट रही है। कनाडा के ऑडिटर जनरल की संसद में पेश रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर 2025 में नए अंतरराष्ट्रीय छात्रों में भारतीयों की हिस्सेदारी सिर्फ 8.1% रही, जबकि 2023 में यह 51.6% थी। भारत के शिक्षा मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, कनाडा जाने वाले भारतीय छात्रों की संख्या 2023 के 2,33,532 से घटकर 2024 में 1,37,608 रह गई, यानी 41% की गिरावट।

इसके पीछे सख्त इमिग्रेशन नियम, बढ़ती जीवन-यापन लागत, कड़े वित्तीय मानदंड और 2023 में भारत-कनाडा के बीच पैदा हुआ राजनयिक तनाव प्रमुख कारण हैं। 2024 की शुरुआत में कनाडा ने अंडरग्रेजुएट और डिप्लोमा प्रोग्राम में दाखिला लेने वाले अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए दो साल की सीमा भी लागू की थी। बड़े शहरों में किराए बढ़ने, स्टडी परमिट की शर्तें सख्त होने और पार्ट-टाइम नौकरियां कम मिलने से भी कनाडा में पढ़ाई के बाद नौकरी और स्थायी बसने का रास्ता पहले जैसा आसान नहीं रहा।

कनाडा ने 'इमिग्रेशन टैप' किया सख्त

प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने जून में कहा था कि अंतरराष्ट्रीय छात्रों का आगमन करीब 60% घटा है और कनाडा ने इमिग्रेशन पर 'कंट्रोल वापस ले लिया है'। इमिग्रेशन, रिफ्यूजीज एंड सिटिजनशिप कनाडा (IRCC) के आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी-अक्टूबर 2025 में अंतरराष्ट्रीय छात्रों का आगमन एक साल पहले की समान अवधि के मुकाबले करीब 60% घटा और 1.5 लाख से ज्यादा की कमी दर्ज हुई। अगस्त 2025 में करीब 45,000 नए स्टडी परमिट जारी हुए, जबकि अगस्त 2024 में यह संख्या लगभग 80,000 थी। अक्टूबर तक नए छात्रों का आगमन 3,000 से थोड़ा अधिक रह गया। सरकार के मुताबिक यह गिरावट महामारी जैसे बाहरी कारणों की बजाय अंतरराष्ट्रीय शिक्षा व्यवस्था को नए सिरे से आकार देने के लिए अपनाई गई सख्त नीतियों का नतीजा है।

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