CBSE Digital Evaluation System: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की डिजिटल कॉपी जांच प्रणाली यानी ऑन स्क्रीन मार्किंग (OSM) को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई है। अदालत ने कहा कि अगर किसी व्यवस्था के कारण छात्रों को परेशानी हो रही है तो उनकी चिंताओं को गंभीरता से समझना जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। अदालत ने कहा कि इसे केवल एक विरोध के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि छात्रों की समस्याओं का स्थायी समाधान निकालने की कोशिश होनी चाहिए।
CBSE की डिजिटल कॉपी जांच प्रणाली क्या है
CBSE ने उत्तर पुस्तिकाओं की जांच प्रक्रिया को तेज और आसान बनाने के लिए ऑन स्क्रीन मार्किंग सिस्टम शुरू किया है। इस व्यवस्था में छात्रों की कॉपियों को डिजिटल रूप में जांचकर्ताओं के सामने भेजा जाता है। इससे कॉपी जांच की प्रक्रिया ऑनलाइन हो जाती है और मूल्यांकन में तेजी आने की उम्मीद रहती है। हालांकि, कुछ छात्रों ने इस सिस्टम को लेकर शिकायतें दर्ज कराई हैं। छात्रों का कहना है कि डिजिटल मूल्यांकन के दौरान कुछ तकनीकी और प्रक्रिया संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
सुप्रीम कोर्ट ने क्यों जताई चिंता
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि छात्रों की परेशानी और निराशा को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि परीक्षा और परिणाम छात्रों के भविष्य से जुड़े होते हैं। इसलिए मूल्यांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता और भरोसा बनाए रखना बेहद जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से इस मामले में सहयोग करने को कहा है।
सरकार ने कोर्ट में क्या बताया
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि जिन छात्रों की मार्कशीट से जुड़ी व्यक्तिगत समस्याओं का मामला सामने आया था, उनमें से ज्यादातर मामलों का समाधान कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार CBSE की ऑन स्क्रीन मार्किंग प्रणाली में सामने आई कमियों को गंभीरता से देख रही है और जरूरी सुधार किए जा रहे हैं।
छात्रों को किन परेशानियों की शिकायत है
कुछ छात्रों और अभिभावकों ने डिजिटल मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए हैं। उनकी मुख्य चिंताएं हैं
अंकों में संभावित गड़बड़ी
पुनर्मूल्यांकन से जुड़ी परेशानियां
तकनीकी समस्याएं
शिकायतों के समाधान में देरी
छात्रों का कहना है कि परीक्षा परिणाम उनके करियर के लिए महत्वपूर्ण होते हैं, इसलिए जांच प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष और भरोसेमंद होनी चाहिए।
तकनीक आधारित शिक्षा में बढ़ रही भूमिका
शिक्षा क्षेत्र में डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। ऑनलाइन परीक्षा और डिजिटल मूल्यांकन जैसी व्यवस्थाओं का उद्देश्य प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और तेज बनाना है। हालांकि, किसी भी नई तकनीक को लागू करते समय छात्रों और शिक्षकों को आने वाली समस्याओं को दूर करना भी जरूरी होता है।
अब आगे क्या होगा
सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद अब सरकार और CBSE को इस मामले में अपना जवाब देना होगा। अदालत यह देखेगी कि छात्रों की समस्याओं को दूर करने और OSM सिस्टम को बेहतर बनाने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
CBSE की डिजिटल कॉपी जांच प्रणाली को लेकर सुप्रीम कोर्ट की चिंता छात्रों के हितों को लेकर महत्वपूर्ण मानी जा रही है। तकनीक से शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाया जा सकता है, लेकिन इसके लिए जरूरी है कि सिस्टम पूरी तरह पारदर्शी और छात्रों के भरोसे के लायक हो। आने वाले समय में CBSE और सरकार के कदम इस व्यवस्था की दिशा तय करेंगे।
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