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CBSE का बड़ा बदलाव: अब 9वीं से छात्रों को 3 भाषाएं पढ़नी होंगी अनिवार्य

by | May 16, 2026 | Cover Story Featured

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (Central Board of Secondary Education) ने छात्रों के लिए भाषा शिक्षा को लेकर एक महत्वपूर्ण बदलाव किया है। नई व्यवस्था के तहत अब 9वीं कक्षा से छात्रों को तीन भाषाओं का अध्ययन करना अनिवार्य होगा। यह कदम राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप उठाया गया है, जिसका उद्देश्य छात्रों को बहुभाषी बनाना और भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देना है।

क्या है नया नियम

CBSE की नई व्यवस्था के अनुसार कक्षा 9 और 10 में अध्ययनरत विद्यार्थियों को तीन भाषाएं पढ़नी होंगी। इनमें कम से कम दो भाषाएं भारतीय भाषाएं हो सकती हैं, जबकि स्कूल और छात्रों के विकल्प के अनुसार तीसरी भाषा का चयन किया जाएगा। यह व्यवस्था छात्रों की भाषाई समझ, संप्रेषण क्षमता और सांस्कृतिक ज्ञान को मजबूत करने के उद्देश्य से लागू की जा रही है।

तीन-भाषा फॉर्मूला क्या है

तीन-भाषा फॉर्मूला भारत की शिक्षा व्यवस्था में लंबे समय से अपनाया जाता रहा है। इसके तहत छात्र आमतौर पर मातृभाषा या क्षेत्रीय भाषा , हिंदी या कोई अन्य भारतीय भाषा, अंग्रेजी या अन्य भाषा, नई नीति का उद्देश्य किसी विशेष भाषा को थोपना नहीं, बल्कि छात्रों को विभिन्न भाषाओं से परिचित कराना है।

9वीं कक्षा से इसे अनिवार्य क्यों किया गया

कक्षा 9 से छात्र विषयों का अधिक व्यवस्थित अध्ययन शुरू करते हैं। इसी चरण में भाषा कौशल को मजबूत करने से आगे की पढ़ाई, प्रतियोगी परीक्षाओं और संचार क्षमता में मदद मिलती है।

छात्रों को कौन-कौन सी भाषाएं पढ़नी पड़ सकती हैं

यह स्कूल की उपलब्धता और CBSE के नियमों पर निर्भर करेगा। सामान्य रूप से छात्र निम्न भाषाओं में से चयन कर सकते हैं । हिंदी,अंग्रेजी,संस्कृत,उर्दू,बंगाली,तमिल,तेलुगु,मराठी,पंजाबी,गुजराती,अन्य स्वीकृत भाषाएं ।

क्या यह नियम भविष्य के लिए लाभदायक है

विशेषज्ञों के अनुसार बहुभाषी शिक्षा से छात्रों की समझ, स्मरण शक्ति और संवाद कौशल बेहतर हो सकते हैं। यह उच्च शिक्षा, रोजगार और प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं में भी उपयोगी साबित हो सकती है।

CBSE का यह नया नियम शिक्षा व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण बदलाव है। 9वीं कक्षा से तीन भाषाओं का अध्ययन अनिवार्य होने से छात्र भाषाई रूप से अधिक सक्षम बनेंगे और भारतीय भाषाओं के प्रति उनका जुड़ाव मजबूत होगा। छात्रों और अभिभावकों को अपने स्कूल की आधिकारिक जानकारी के अनुसार विषय चयन की तैयारी करनी चाहिए।

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