CBSE: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने सोमवार को तीन-भाषा नीति के क्रियान्वयन को लेकर नए दिशा-निर्देश जारी किए। बोर्ड ने मौजूदा 10वीं कक्षा के छात्रों को इस नीति से छूट देते हुए स्पष्ट किया कि उन्हें तीन भाषाएं पढ़ना अनिवार्य नहीं होगा।
9वीं के छात्रों को एकमुश्त राहत
CBSE की अकादमिक निदेशक प्रज्ञा एम. सिंह ने बताया कि 2026-27 में 9वीं कक्षा में पढ़ रहे छात्रों को एकमुश्त राहत दी गई है। ये छात्र दो विदेशी (गैर-भारतीय) भाषाओं के साथ एक भारतीय भाषा को तीसरी भाषा के रूप में पढ़ सकेंगे। वहीं, वर्तमान 7वीं से 9वीं तक के छात्रों को 10वीं में पहुंचने पर तीसरी भाषा का बोर्ड परीक्षा नहीं देनी होगी।
गौरतलब है कि बोर्ड ने पहले घोषणा की थी कि 1 जुलाई से 9वीं कक्षा के छात्रों के लिए तीन भाषाएं पढ़ना अनिवार्य होगा, जिसमें कम से कम दो भारतीय भाषाएं शामिल होंगी। इस फैसले के खिलाफ कई छात्र और अभिभावक अदालत भी पहुंचे थे।
गणित और विज्ञान में भी नया सिस्टम
अप्रैल में CBSE ने 2026-27 सत्र से 6वीं कक्षा से चरणबद्ध तरीके से तीन-भाषा फार्मूला लागू करने और 9वीं में गणित व विज्ञान के लिए दो-स्तरीय प्रणाली लागू करने की घोषणा की थी। इसके तहत दोनों विषयों में स्टैंडर्ड (अनिवार्य) और एडवांस्ड (वैकल्पिक) स्तर होंगे। सभी छात्र 80 अंकों की समान परीक्षा देंगे, जबकि एडवांस्ड स्तर चुनने वाले छात्रों के लिए अतिरिक्त परीक्षा होगी, जो उनकी गहरी समझ और उच्च स्तर की सोच का मूल्यांकन करेगी।
बोर्ड के अनुसार, नई दो-स्तरीय प्रणाली के तहत पहली 10वीं बोर्ड परीक्षा वर्ष 2028 में होगी। वहीं, 15 मई को CBSE ने स्पष्ट किया था कि विदेशी भाषा केवल तीसरी भाषा के रूप में (दो भारतीय भाषाएं पढ़ने के बाद) या अतिरिक्त चौथी भाषा के रूप में ही चुनी जा सकेगी।
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