Gyanesh Kumar Impeachment: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग के बीच लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि अगर विपक्ष की ओर से नया महाभियोग प्रस्ताव आता है, तो उस पर नियमों और प्रक्रियाओं के तहत विचार किया जाएगा। विपक्षी गठबंधन INDIA ब्लॉक ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने की बात कही है। विपक्ष मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान कथित अनियमितताओं को लेकर उनके इस्तीफे की मांग कर रहा है। पिछले दो हफ्तों में देश के अलग-अलग हिस्सों में इसे लेकर प्रदर्शन भी हुए हैं।
पहले भी दो बार दिया जा चुका है नोटिस
ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग पहले भी दो बार उठ चुकी है। पहली बार 12 मार्च को लोकसभा के 130 और राज्यसभा के 63 सांसदों के हस्ताक्षर वाला नोटिस दिया गया था। हालांकि, लोकसभा और राज्यसभा दोनों ने इसे खारिज कर दिया था। दूसरी बार दिया गया नोटिस अभी राज्यसभा में लंबित है। ओम बिरला ने कहा कि यदि नया नोटिस आता है, तो उसकी जांच निर्धारित नियमों के अनुसार की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि इस संबंध में प्रक्रिया स्पष्ट है।
CEC को हटाने के लिए क्या है संवैधानिक प्रक्रिया
संविधान के अनुसार, मुख्य चुनाव आयुक्त को उसी प्रक्रिया के तहत पद से हटाया जा सकता है, जो सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को हटाने के लिए अपनाई जाती है। इसके लिए संसद के दोनों सदनों में निर्धारित विशेष बहुमत से प्रस्ताव पारित होना जरूरी है। प्रस्ताव का आधार साबित कदाचार या अक्षमता होना चाहिए।
जांच समिति कैसे करती है आरोपों की पड़ताल
‘जज (जांच) अधिनियम, 1968’ के तहत, प्रस्ताव स्वीकार किए जाने पर लोकसभा अध्यक्ष या राज्यसभा सभापति तीन सदस्यीय जांच समिति गठित करते हैं। इसमें सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश या भारत के मुख्य न्यायाधीश, किसी उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और एक प्रख्यात विधिवेत्ता शामिल होते हैं। समिति आरोपों की जांच कर अपनी रिपोर्ट सौंपती है। यदि रिपोर्ट में आरोप साबित नहीं होते, तो प्रस्ताव पर आगे कार्रवाई नहीं की जाती। आरोप साबित होने पर रिपोर्ट और प्रस्ताव संसद के संबंधित सदन या सदनों में विचार के लिए रखे जाते हैं।
दोनों सदनों की मंजूरी के बाद आगे क्या होगा
यदि संसद के दोनों सदन निर्धारित बहुमत से प्रस्ताव पारित कर देते हैं, तो उसी सत्र में राष्ट्रपति से संबंधित पदाधिकारी को हटाने का अनुरोध किया जाता है। इस प्रक्रिया में दोनों सदनों की मंजूरी जरूरी होती है। वहीं, मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023 के अनुसार, मुख्य चुनाव आयुक्त या अन्य चुनाव आयुक्त राष्ट्रपति को लिखित इस्तीफा देकर अपना पद छोड़ सकते हैं।
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