China Economy Crisis: दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था चीन इन दिनों आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रही है। लंबे समय तक तेज विकास दर के लिए पहचाने जाने वाले चीन की आर्थिक रफ्तार अब धीमी होती दिखाई दे रही है। दूसरी ओर, भारत की अर्थव्यवस्था लगातार मजबूत प्रदर्शन कर रही है, जिससे वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में दोनों देशों के बीच अंतर पर चर्चा तेज हो गई है। हालिया आर्थिक आंकड़ों के अनुसार, चीन की जीडीपी ग्रोथ में गिरावट देखने को मिली है, जबकि भारत की विकास दर अपेक्षाकृत बेहतर बनी हुई है। इससे निवेशकों और वैश्विक संस्थानों का ध्यान भारत की ओर बढ़ रहा है।
चीन की अर्थव्यवस्था क्यों हो रही कमजोर
चीन की आर्थिक सुस्ती के पीछे कई बड़े कारण माने जा रहे हैं। इनमें रियल एस्टेट सेक्टर का संकट, कमजोर घरेलू मांग, युवाओं में बढ़ती बेरोजगारी और वैश्विक बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा प्रमुख हैं। चीन का रियल एस्टेट क्षेत्र, जो कभी उसकी अर्थव्यवस्था का बड़ा आधार था, पिछले कुछ वर्षों से दबाव में है। कई बड़ी रियल एस्टेट कंपनियों की आर्थिक परेशानियों ने निवेशकों का भरोसा प्रभावित किया है। इसके अलावा, कोरोना महामारी के बाद चीन की अर्थव्यवस्था को उम्मीद के मुताबिक तेजी नहीं मिल पाई। घरेलू खपत में कमी और व्यापार से जुड़ी चुनौतियों ने भी विकास की गति को प्रभावित किया है।
भारत की आर्थिक रफ्तार क्यों बनी मजबूत
भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में कई क्षेत्रों का योगदान रहा है। तेजी से बढ़ता डिजिटल सेक्टर, इंफ्रास्ट्रक्चर पर बढ़ता निवेश, घरेलू मांग और विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा देने वाली नीतियां इसकी प्रमुख वजहों में शामिल हैं। भारत में युवा आबादी, बढ़ता मध्यम वर्ग और डिजिटल अर्थव्यवस्था का विस्तार आर्थिक विकास को गति देने वाले महत्वपूर्ण कारक माने जाते हैं।
जीडीपी ग्रोथ में दिखा अंतर
आर्थिक आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल-जून तिमाही में चीन की आर्थिक विकास दर लगभग 4.3 प्रतिशत रही, जबकि भारत की विकास दर इससे अधिक मजबूत रही। यही वजह है कि वैश्विक स्तर पर भारत को तेजी से उभरती अर्थव्यवस्थाओं में गिना जा रहा है। हालांकि, दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं की संरचना अलग-अलग है। चीन एक बड़ा निर्यात आधारित विनिर्माण केंद्र है, जबकि भारत की अर्थव्यवस्था में सेवा क्षेत्र और घरेलू मांग की भूमिका काफी महत्वपूर्ण है।
वैश्विक कंपनियों की नजर भारत पर
चीन में बढ़ती लागत और नीतिगत चुनौतियों के बीच कई वैश्विक कंपनियां अपनी सप्लाई चेन को नए देशों में फैलाने पर विचार कर रही हैं। भारत को इसका फायदा मिल सकता है क्योंकि यहां बड़ा बाजार, कुशल युवा श्रम शक्ति और उत्पादन बढ़ाने की क्षमता मौजूद है। सरकार की "मेक इन इंडिया" जैसी पहल भी देश में विनिर्माण को बढ़ावा देने का प्रयास कर रही है।
क्या भारत चीन से आगे निकल जाएगा
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के पास लंबी अवधि में तेज विकास की क्षमता है, लेकिन चीन से आगे निकलने के लिए कई चुनौतियों को दूर करना होगा। इनमें रोजगार सृजन, शिक्षा, कौशल विकास, बुनियादी ढांचे में सुधार और निर्यात बढ़ाना शामिल है। भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ रही है, लेकिन दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था चीन अभी भी कई क्षेत्रों में मजबूत स्थिति रखता है।
चीन की धीमी होती आर्थिक रफ्तार और भारत की मजबूत विकास दर ने वैश्विक आर्थिक संतुलन में बदलाव की चर्चा शुरू कर दी है। जहां चीन को अपनी अर्थव्यवस्था को फिर गति देने की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है, वहीं भारत के पास विकास के नए अवसर दिखाई दे रहे हैं। आने वाले वर्षों में दोनों देशों की नीतियां और आर्थिक सुधार यह तय करेंगे कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में उनकी स्थिति किस दिशा में आगे बढ़ती है।
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