दुनिया

रेयर मेटल सप्लाई… चीन की अमेरिका को सख्त चेतावनी! ईरान पर हमला किया तो भुगतना होगा बुरा अंजाम

US-Iran Tension: अमेरिका और ईरान के बढ़ते तनाव के बीच चीन ने खुलकर अपनी ताकत दिखाई है। बीजिंग ने वाशिंगटन को चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका ने ईरान पर कोई हमला किया, तो वह तुरंत अपने रेयर मेटल एक्सपोर्ट को रोक देगा। यह ऐसे समय में हुआ है जब जिनेवा में ईरान और अमेरिका के बीच ओमान की मध्यस्थता में बैठक होने वाली है।

विशेषज्ञों का कहना है कि चीन का यह कदम अमेरिका के लिए बेहद गंभीर है क्योंकि दुनिया में सबसे ज्यादा रेयर मेटल चीन के पास ही है, और अमेरिका अपनी सैन्य और हाई-टेक इंडस्ट्री के लिए इसका भारी इस्तेमाल करता है।

अमेरिका की सैन्य शक्ति का आधार

रेयर मेटल का इस्तेमाल मिसाइल गाइडेंस सिस्टम, फाइटर जेट इंजन और हाई-टेक इलेक्ट्रॉनिक्स में होता है। अमेरिकी एफ-35 जैसे सबसे खतरनाक लड़ाकू विमान इस मेटल पर निर्भर हैं। CRF रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका के सैन्य खर्च का लगभग 5 प्रतिशत इसी मेटल पर खर्च होता है। अमेरिका की कुल खपत का 90 प्रतिशत रेयर मेटल चीन से आता है। इसलिए चीन की यह धमकी न सिर्फ सैन्य उत्पादन बल्कि अमेरिका की रक्षा रणनीति और सुरक्षा तैयारियों को भी ठप कर सकती है। चीन के इस कदम से अनुमान है कि अमेरिका का सैन्य उद्योग केवल 48 घंटों में ठप पड़ सकता है।

ईरान को हथियारों की भी मिली मंजूरी

रिपोर्ट के मुताबिक, चीन ईरान को सुपरसोनिक एंटी-शिप मिसाइलें देने की तैयारी में है। इनमें मुख्य रूप से CM-302 मिसाइलें शामिल हैं, जिनकी मारक क्षमता लगभग 290 किलोमीटर है। सैन्य विशेषज्ञों के अनुसार, यह मिसाइल अमेरिकी मिडिल ईस्ट बेस को भी गंभीर नुकसान पहुंचा सकती हैं। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट का कहना है कि CM-302 मिसाइल दुनिया की सबसे खतरनाक एंटी-शिप मिसाइलों में गिनी जाती है, जो विमानवाहक पोत और विध्वंसक पोतों को डुबाने में सक्षम है।

चीन के लिए ईरान की रणनीतिक अहमियत

ईरान चीन का सबसे बड़ा तेल और ऊर्जा सप्लायर है। लॉजिस्टिक विशेषज्ञों के अनुसार, चीन हर दिन लगभग 1.8 मिलियन बैरल तेल ईरान से खरीदता है। ईरान का करीब 80 प्रतिशत तेल सीधे चीन को जाता है। अगर अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध छिड़ता है, तो इसका असर होर्मुज स्ट्रेट पर पड़ेगा, जो चीन के व्यापार मार्ग का मुख्य हिस्सा है। यह मार्ग बंद होने से चीन को भारी आर्थिक नुकसान होगा। यही कारण है कि चीन ने ईरान के साथ अपने स्ट्रैटेजिक और सैन्य संबंधों को और मजबूत किया है।

विश्लेषक क्या कहते हैं?

विश्लेषकों का मानना है कि चीन ने अमेरिका को यह साफ संदेश दिया है कि ईरान पर हमला करने की कीमत अमेरिका को आर्थिक और सैन्य दोनों रूप में चुकानी पड़ेगी। चीन की यह कड़ी चेतावनी केवल ईरान की सुरक्षा ही नहीं, बल्कि मिडिल ईस्ट में अमेरिकी रणनीति पर भारी प्रभाव डाल सकती है।

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Shagun Chaurasia

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