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Article 370 हटने के बाद भी क्यों बरकरार है चिनार संरक्षण कानून, जानिए इसकी पूरी कहानी

by | Aug 5, 2026 | News Big

अगस्त 2019 में केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर से Article 370 और 35A को हटाकर राज्य की विशेष संवैधानिक व्यवस्था को समाप्त कर दिया था। इसके बाद कई पुराने कानूनों में बदलाव हुए और अनेक स्थानीय प्रावधान खत्म कर दिए गए। हालांकि, एक ऐसा कानून है जिसे केंद्र सरकार ने न केवल बरकरार रखा बल्कि उसकी अहमियत को भी स्वीकार किया। यह कानून है जम्मू-कश्मीर प्रिजर्वेशन ऑफ स्पेसिफाइड ट्रीज़ एक्ट, 1969, जो घाटी के प्रसिद्ध चिनार पेड़ों की सुरक्षा सुनिश्चित करता है।

कश्मीर की पहचान है चिनार

चिनार का पेड़ सिर्फ एक वनस्पति नहीं, बल्कि कश्मीर की सांस्कृतिक पहचान माना जाता है। सदियों से यह पेड़ घाटी की कला, साहित्य, लोकगीतों और सामाजिक जीवन का हिस्सा रहा है। पतझड़ के मौसम में जब इसके पत्ते लाल और सुनहरे रंग में बदलते हैं, तब कश्मीर का प्राकृतिक सौंदर्य दुनिया भर के पर्यटकों को आकर्षित करता है।

क्यों बनाया गया था यह कानून

विशेषज्ञों के अनुसार बीते दशकों में शहरीकरण, निर्माण कार्यों और पर्यावरणीय दबावों के कारण चिनार के पेड़ों की संख्या लगातार घट रही थी। इसी चिंता को देखते हुए 1969 में यह कानून बनाया गया। इसके तहत चिनार समेत कुछ विशेष पेड़ों को बिना सरकारी अनुमति काटना, नुकसान पहुंचाना या हटाना प्रतिबंधित है।

370 हटने के बाद भी क्यों नहीं बदला कानून

Article 370 हटने के बाद केंद्र सरकार ने उन कानूनों को प्राथमिकता दी जो प्रशासनिक या संवैधानिक व्यवस्था से जुड़े थे। लेकिन चिनार संरक्षण कानून का उद्देश्य पर्यावरण और सांस्कृतिक विरासत की रक्षा करना है। यही वजह है कि इसे बनाए रखा गया। सरकार और पर्यावरण विशेषज्ञ मानते हैं कि चिनार सिर्फ एक पेड़ नहीं, बल्कि कश्मीर की ऐतिहासिक धरोहर है।

इतिहास और संस्कृति से जुड़ा गहरा रिश्ता

इतिहासकारों के अनुसार मुगल काल से ही चिनार घाटी की सुंदरता का प्रमुख प्रतीक रहा है। अकबर और जहांगीर के दौर के कई ऐतिहासिक दस्तावेजों में चिनार का उल्लेख मिलता है। कश्मीरी कविताओं, सूफी साहित्य और लोककथाओं में भी चिनार को विशेष स्थान दिया गया है।

पर्यावरण संरक्षण का भी है बड़ा महत्व

विशेषज्ञ बताते हैं कि चिनार पेड़ स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। ये तापमान संतुलित रखने, जैव विविधता को बढ़ावा देने और वायु गुणवत्ता सुधारने में मदद करते हैं। इसलिए इनकी सुरक्षा केवल सांस्कृतिक नहीं बल्कि पर्यावरणीय आवश्यकता भी है।

Article 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर में कई कानूनी और प्रशासनिक बदलाव हुए, लेकिन चिनार संरक्षण कानून का बने रहना यह दिखाता है कि विकास के साथ-साथ विरासत और पर्यावरण संरक्षण भी उतना ही जरूरी है। कश्मीर की पहचान माने जाने वाले चिनार आज भी उसी कानूनी सुरक्षा के तहत संरक्षित हैं, जो उन्हें दशकों पहले दी गई थी।

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