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बिल पास करने को लेकर SC का फैसला, अदालत राज्यपाल की भूमिका को टेकओवर नहीं कर सकती

Supreme Court : सीजेआई के नेतृत्व वाली पांच जजों की संविधान पीठ ने फैसला सुनाया है। राष्ट्रपति और राज्यपाल के लिए विधेयकों पर मंजूरी की समयसीमा तय के मामले पर सुप्रीम कोर्ट में चली लंबी सुनवाई के बाद ये फैसला लिया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अदालत राज्यपाल की भूमिका को टेकओवर नहीं कर सकती। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि समय-सीमा लागू करना संविधान द्वारा इतनी सावधानी से संरक्षित इस लचीलेपन के बिल्कुल विपरीत होगा।

कोर्ट ने क्या-क्या कहा?

सुनवाई के दौरान सीजेआई ने कहा, केंद्र और राज्य सरकारों की ओर से राष्ट्रपति संदर्भ के पक्ष में दी गई दलीलों को सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में दर्ज किया गया है। उन्होंने कहा कि पहला मुद्दा यह है कि हम राज्यपाल के साथ विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। दलील यह है कि विषय स्पष्ट है प्रस्तुत होने पर राज्यपाल विधेयक को स्वीकृति दे सकते हैं या उसे रोक सकते हैं या राष्ट्रपति के लिए आरक्षित कर सकते हैं।

इस दलील के अनुसार पहला लेकिन एक अतिरिक्त विकल्प है, जिससे उनके पास कुल 4 विकल्प उपलब्ध हो जाते हैं। इसके खिलाफ, दूसरे पक्ष ने कहा कि उनके पास केवल तीन विकल्प हैं, रोकना, स्वीकृति देना या विधानसभा को भेजना और यदि सदन पारित करता है, तो राज्यपाल स्वीकृति देने के लिए बाध्य हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अदालत राज्यपाल की भूमिका को टेकओवर नहीं कर सकती। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने माना ​कि राज्यपाल राज्य विधेयकों पर अनिश्चित काल तक रोक नहीं लगा सकते, लेकिन उसने राज्यपालों और राष्ट्रपति के लिए कोई समयसीमा निर्धारित करने से इनकार कर दिया और कहा कि ऐसा करना शक्तियों के पृथक्करण के विरुद्ध होगा।

SC की बड़ी बाते

  • राज्यपाल पर कोई समय-सीमा नहीं लगा सकता
  • राज्यपाल विधेयकों पर अनिश्चित काल तक रोक नहीं लगा सकते
  • राज्यपाल विधेयक पर अपनी स्वीकृति नहीं दे रहे हैं, तो उसे विधानसभा को वापस भेजा जाना चाहिए.
  • अदालत राज्यपाल की भूमिका को टेकओवर नहीं कर सकती
  • विधेयकों पर निर्णय लेने के लिए समय-सीमा नहीं थोप सकते
  • तमिलनाडु मामले में 2 जजों की पीठ द्वारा दिया गया ऐसा निर्देश असंवैधानिक

पूरा मामला क्या है?

31 अक्टूबर 2023 को तमिलनाडु सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। सरकार ने कहा कि राज्यपाल आरएन रवि ने कई विधेयक और प्रस्ताव बिना कोई जवाब दिए अनिश्चित समय तक रोक रखे हैं। ये मामले चार तरह के हैं।

8 अप्रैल 2025 को सुप्रीम कोर्ट की पीठ (न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति आर. महादेवन) ने राज्यपाल की देरी को गलत माना। अदालत ने अपने खास अधिकार (अनुच्छेद 142) का इस्तेमाल करते हुए इन लंबित विधेयकों को स्वीकृत माना।

Kajal Sharma

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