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25 साल की युवती पर नहीं, क्रिमिनल रिकार्ड्स वाले सांसदों पर ध्यान दे पुलिस: CJP ने Zero FIR को घेरा

by | Jul 31, 2026 | News Latest

Ruchika Singh FIR: CJP ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर हालिया प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाली महिला के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले का विरोध किया है। पार्टी प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि अगर किसी को टिप्पणी से आपत्ति है तो उसे आपराधिक न्याय व्यवस्था का सहारा लेने के बजाय मानहानि की कार्रवाई करनी चाहिए।

दास ने रुचिका सिंह के खिलाफ दर्ज FIR पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि आपत्तिजनक या अपमानजनक भाषा का समर्थन नहीं किया जा सकता, लेकिन ऐसी टिप्पणियों पर आपराधिक मुकदमा चलाने से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर 'डर का माहौल' पैदा होगा।

'मानहानि की कार्रवाई का विकल्प खुला है'

सौरव दास ने कहा कि अगर किसी बयान को अपमानजनक माना जाता है तो संबंधित व्यक्ति के पास दीवानी और आपराधिक मानहानि की कार्रवाई का विकल्प है। उन्होंने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ आपराधिक न्याय व्यवस्था के इस्तेमाल को निंदनीय बताया और कहा कि केवल आपत्तिजनक भाषा के इस्तेमाल के लिए किसी को दंडित नहीं किया जाना चाहिए।

उन्होंने युवाओं से भी विरोध प्रदर्शन के दौरान शब्दों के चयन में सावधानी बरतने की अपील की। हालांकि, उन्होंने पुलिस से संयम बरतने और राजनीतिक उद्देश्यों के लिए अपनी शक्तियों का दुरुपयोग न करने को कहा।

X पोस्ट में पुलिस पर लगाया शक्ति के दुरुपयोग का आरोप

शुक्रवार को X पर एक पोस्ट में दास ने लिखा कि रुचिका सिंह के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई अस्वीकार्य है। उन्होंने दावा किया कि गाली-गलौज के लिए आपराधिक मामला दर्ज नहीं होना चाहिए। साथ ही उन्होंने पुलिस से 25 वर्षीय युवती के बजाय आपराधिक मामलों वाले सांसदों पर ध्यान देने की बात कही और युवाओं के उत्पीड़न को तुरंत रोकने की मांग की।

29 जुलाई को दर्ज हुई Zero FIR

रुचिका सिंह के खिलाफ 23 जुलाई को जंतर-मंतर पर NEET पेपर लीक विरोधी प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री के खिलाफ कथित 'अपमानजनक और आपत्तिजनक' टिप्पणी करने के आरोप में Zero FIR दर्ज की गई थी। यह FIR 29 जुलाई को गाजियाबाद निवासी स्मृति सिंह की शिकायत पर गौतम बुद्ध नगर के एक्सप्रेसवे थाने में दर्ज हुई।

शिकायत में आरोप लगाया गया कि टिप्पणी से प्रधानमंत्री के संवैधानिक पद की गरिमा को ठेस पहुंची और इसका उद्देश्य दुर्भावना व नफरत फैलाना तथा सार्वजनिक शांति भंग करना था।

पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 352, 353(1) और 356(1) के तहत मामला दर्ज किया है। Zero FIR किसी भी थाने में दर्ज की जा सकती है, भले ही अपराध का स्थान उसके अधिकार क्षेत्र में न आता हो। इसका उद्देश्य क्षेत्राधिकार के कारण जांच में देरी रोकना है।

36 दिन बाद खत्म हुआ आंदोलन

यह मामला जंतर-मंतर पर NEET पेपर लीक और परीक्षा में अनियमितताओं को लेकर CJP के छात्र आंदोलन से जुड़ा है। 36 दिनों तक चले इस प्रदर्शन में पुलिस से टकराव हुआ और तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की स्थिति भी बनी। 25 जुलाई को केंद्र द्वारा पार्टी की प्रमुख मांगें स्वीकार किए जाने के बाद आंदोलन समाप्त हुआ।

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