Datia By Election BJP Rebel: मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी (BJP) के भीतर बड़ा राजनीतिक विवाद सामने आया है। पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा को टिकट नहीं मिलने के बाद उनके समर्थकों में नाराजगी खुलकर सामने आ गई। विरोध इतना बढ़ गया कि पार्टी के जिला अध्यक्ष रघुवीर सिंह कुशवाह ने अपनी पूरी जिला कार्यकारिणी के साथ सामूहिक इस्तीफा दे दिया। इस घटनाक्रम ने चुनाव से पहले भाजपा की संगठनात्मक चुनौती बढ़ा दी है।
जिलाध्यक्ष ने सौंपा सामूहिक इस्तीफा
जिला अध्यक्ष रघुवीर सिंह कुशवाह ने प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल को भेजे अपने इस्तीफे में कहा कि उन्होंने कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों से चर्चा के बाद यह निर्णय लिया है। उनके साथ जिला संगठन के कई पदाधिकारियों ने भी अपने पद छोड़ दिए। इस सामूहिक इस्तीफे को भाजपा के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
समर्थकों ने हाईवे जाम कर किया विरोध
नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों ने टिकट बदलने के फैसले के खिलाफ सड़क पर उतरकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने हाईवे जाम कर पार्टी नेतृत्व के खिलाफ नाराजगी जताई। कार्यकर्ताओं का कहना था कि डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने वर्षों तक दतिया क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया, लेकिन इस बार उन्हें टिकट नहीं देकर ऐसे उम्मीदवार को मैदान में उतारा गया, जिसे क्षेत्र में बहुत कम लोग जानते हैं। शुक्रवार देर रात तक बड़ी संख्या में कार्यकर्ता भाजपा कार्यालय और हाईवे के आसपास डटे रहे। पुलिस ने जाम खुलवाने और स्थिति सामान्य करने के लिए काफी प्रयास किए।
BJP के सामने बढ़ी चुनावी चुनौती
दतिया उपचुनाव अब भाजपा के लिए आसान नहीं माना जा रहा है। पार्टी को एक ओर चुनावी मुकाबले की तैयारी करनी है, वहीं दूसरी ओर नाराज कार्यकर्ताओं को मनाने की चुनौती भी सामने है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि संगठन के भीतर असंतोष जल्द दूर नहीं हुआ तो इसका असर चुनावी परिणाम पर भी पड़ सकता है।
त्रिकोणीय मुकाबले की चर्चा तेज
दतिया की राजनीति में मौजूदा घटनाक्रम के बाद मुकाबला और दिलचस्प हो गया है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि डॉ. नरोत्तम मिश्रा आगे क्या भूमिका निभाते हैं और भाजपा अपने असंतुष्ट नेताओं व कार्यकर्ताओं को कैसे साथ लेकर चलती है।
दतिया में उपचुनाव क्यों हो रहा है
दतिया विधानसभा सीट पर उपचुनाव कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की विधानसभा सदस्यता रद्द होने के बाद कराया जा रहा है। उनकी सदस्यता एक सहकारी बैंक धोखाधड़ी से जुड़े मामले में न्यायालय के फैसले के बाद समाप्त हुई, जिसके कारण यह सीट रिक्त हो गई और निर्वाचन आयोग ने उपचुनाव की घोषणा की।
दतिया उपचुनाव से पहले भाजपा के भीतर उभरा असंतोष पार्टी के लिए बड़ी राजनीतिक चुनौती बन गया है। टिकट को लेकर शुरू हुआ विवाद अब संगठनात्मक संकट का रूप ले चुका है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि पार्टी नेतृत्व नाराज कार्यकर्ताओं को मनाने में कितना सफल होता है और इसका उपचुनाव पर क्या असर पड़ता है।
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