Delhi: हाल ही में हुई बारिश के बाद दिल्ली की हवा साफ और ताजा महसूस हो रही थी, जिससे लोगों को प्रदूषण से अस्थायी राहत मिली थी। लेकिन यह राहत ज्यादा समय तक नहीं टिक सकी। रविवार को राजधानी का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 261 दर्ज किया गया, जो 'खराब' श्रेणी में आता है। यह पिछले 85 दिनों का सबसे खराब AQI है। इस स्तर की हवा बच्चों, बुजुर्गों और सांस संबंधी बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए अधिक जोखिम पैदा कर सकती है।
बारिश के बाद हवा अचानक क्यों बिगड़ी?
विशेषज्ञों के अनुसार, बारिश के दौरान हवा में मौजूद धूल और प्रदूषक कण जमीन पर बैठ जाते हैं, जिससे वातावरण साफ हो जाता है। लेकिन जैसे ही बारिश थमी, गर्मी और उमस बढ़ गई। इसके साथ चली तेज और सूखी हवाओं ने सड़कों, खाली मैदानों और निर्माण स्थलों पर जमी धूल को दोबारा हवा में उड़ा दिया। यही धूल पूरे शहर में फैल गई और AQI तेजी से बढ़ गया।
इस बार PM10 बना मुख्य वजह
सर्दियों में दिल्ली का प्रदूषण आमतौर पर वाहनों के धुएं, फैक्ट्रियों, पराली और पटाखों से निकलने वाले PM2.5 कणों के कारण बढ़ता है। हालांकि इस बार हवा खराब होने की मुख्य वजह PM10 यानी बड़े धूल कण रहे, जो तेज हवाओं के कारण वातावरण में फैल गए।
किन इलाकों पर सबसे ज्यादा असर?
पूरे दिल्ली-एनसीआर में हवा की गुणवत्ता प्रभावित रही, लेकिन आनंद विहार सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में शामिल रहा। यहां भारी ट्रैफिक, लगातार निर्माण कार्य और आसपास की व्यस्त सड़कों के कारण धूल का स्तर पहले से अधिक रहता है।
आगे क्या मिल सकती है राहत?
विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों का मौसम ही तय करेगा कि प्रदूषण कितना रहेगा। यदि अच्छी बारिश होती है तो धूल दोबारा जमीन पर बैठ जाएगी और AQI में सुधार संभव है। वहीं बारिश नहीं होने और सूखी हवाएं चलने पर प्रदूषण कुछ समय तक ऊंचा बना रह सकता है। हालांकि इसे फिलहाल सर्दियों जैसे लंबे प्रदूषण की स्थिति नहीं माना जा रहा है, फिर भी बच्चों, बुजुर्गों और सांस के मरीजों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
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