Delhi: राजौरी गार्डन स्थित RG Hospitals के चीफ यूरोलॉजिस्ट डॉ. सुशील खरबंदा ने बताया कि मरीज सामान्य पुरुष जीवन जी रहा था और उसमें पुरुषों जैसे सभी शारीरिक लक्षण थे। हालांकि, जांच में दोनों टेस्टिस अंडकोष में नहीं मिले। सीमेन टेस्ट में भी कोई स्पर्म नहीं था, जिसे एजोस्पर्मिया कहा जाता है।
इसके बाद क्रोमोसोम, हार्मोन और इमेजिंग टेस्ट किए गए। जांच में मरीज का XY पुरुष क्रोमोसोम पैटर्न सामने आया, लेकिन अल्ट्रासाउंड और MRI में शरीर के अंदर एक पूरी तरह विकसित गर्भाशय मिला। दोनों टेस्टिस भी शरीर के अंदर थे और दिखने में ओवरी जैसे नजर आ रहे थे।
एंड्रोलॉजिस्ट डॉ. चिराग भंडारी के मुताबिक, यह Persistent Mullerian Duct Syndrome (PMDS) नाम की बेहद दुर्लभ स्थिति हो सकती है। इसमें पुरुष क्रोमोसोम और सामान्य पुरुष बाहरी जननांग होने के बावजूद गर्भाशय और कभी-कभी फैलोपियन ट्यूब जैसी Mullerian संरचनाएं मौजूद रहती हैं। सामान्य पुरुष भ्रूण विकास में टेस्टिस से निकलने वाला Anti-Mullerian Hormone (AMH) इन संरचनाओं को खत्म करता है। AMH की कमी या शरीर की ओर से हार्मोन पर पर्याप्त प्रतिक्रिया न होने पर ये संरचनाएं बनी रह सकती हैं।
शरीर के अंदर, खासकर पेट में मौजूद टेस्टिस का तापमान सामान्य से अधिक होता है, जिससे स्पर्म बनना प्रभावित हो सकता है। हालांकि PMDS का मतलब यह नहीं कि व्यक्ति पिता नहीं बन सकता। टेस्टिस सामान्य रूप से काम कर रहे हों और स्पर्म मौजूद हों तो प्राकृतिक रूप से संतान संभव है। स्पर्म न मिलने पर टेस्टिस से सीधे स्पर्म निकालकर IVF या ICSI जैसी तकनीकों पर विचार किया जा सकता है।
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