Delhi Monsoon Delay 2026: दक्षिण-पश्चिम मॉनसून सामान्य तौर पर केरल से शुरू होकर 15 जून तक दिल्ली पहुंच जाता है, लेकिन इस बार बादल और नमी होने के बावजूद अच्छी बारिश नहीं हो रही। इसकी वजह सिर्फ मौसम नहीं, बल्कि समुद्र, हवाओं और वायुमंडलीय परिस्थितियों में हो रहे बदलाव हैं।
अल-नीनो ने कमजोर किया मॉनसून
प्रशांत महासागर में इस समय मजबूत अल-नीनो विकसित हो रहा है। विश्व मौसम संगठन (WMO) के अनुसार जुलाई-सितंबर 2026 के दौरान इसके और मजबूत होने की संभावना है। अल-नीनो के दौरान समुद्र का तापमान सामान्य से 2 डिग्री सेल्सियस या अधिक बढ़ जाता है, जिससे ट्रेड विंड्स कमजोर पड़ती हैं। इसके कारण भारत की ओर आने वाली नमी कम हो जाती है। वैज्ञानिक अध्ययनों के मुताबिक, ऐसे वर्षों में खासकर दिल्ली और उत्तर भारत में सामान्य से कम बारिश होती है। अल-नीनो वॉकर सर्कुलेशन को भी प्रभावित करता है, जिससे भारत-इंडोनेशिया क्षेत्र में उच्च वायुदाब बनता है और वर्षा घट जाती है।
बादल हैं, लेकिन बारिश क्यों नहीं?
मॉनसून की नमी अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से आती है, लेकिन इस समय समुद्री सतह का तापमान अपेक्षाकृत कम या अनियमित है। साथ ही इंडियन ओशन डाइपोल (IOD) की न्यूट्रल या नकारात्मक स्थिति नमी के प्रवाह को कमजोर कर रही है। निचले स्तर पर नमी पहुंचने से बादल बन रहे हैं, लेकिन ऊपरी वायुमंडल की शुष्क हवाएं और हाई प्रेशर सिस्टम घने बादलों को विकसित नहीं होने दे रहे। इस स्थिति को ड्राई स्पेल या ब्रेक मॉनसून कहा जाता है।
जेट स्ट्रीम, जलवायु परिवर्तन और असर
अल-नीनो के कारण जेट स्ट्रीम सामान्य से उत्तर की ओर खिसक गई है, जिससे पश्चिमी विक्षोभ दिल्ली तक कम पहुंच रहे हैं। नतीजतन दिन में गर्मी और उमस बढ़ रही है, जबकि रात में बादलों की वजह से तापमान नीचे नहीं आ रहा। IPCC के अनुसार, जलवायु परिवर्तन से बारिश का पैटर्न असमान होता जा रहा है—कहीं भारी वर्षा तो कहीं लंबे सूखे की स्थिति बन रही है। दिल्ली-एनसीआर में तेज शहरीकरण और कंक्रीट का विस्तार भी स्थानीय स्तर पर बादल बनने की प्रक्रिया को प्रभावित कर रहा है।
इसका असर खेती, जल आपूर्ति, बिजली खपत और स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा है। किसानों की रोपाई प्रभावित हो रही है, बिजली की मांग बढ़ी है और उमस के कारण डिहाइड्रेशन, सांस संबंधी बीमारियां व वायरल संक्रमण बढ़ रहे हैं। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने पहले ही सामान्य से थोड़ी कम बारिश का अनुमान जताया था। CFSv2 और ECMWF जैसे मौसम मॉडल भी सक्रिय-ब्रेक मॉनसून चक्र की पुष्टि कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि IOD पॉजिटिव होता है या मजबूत पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होता है तो अगले कुछ सप्ताह में राहत मिल सकती है, हालांकि जुलाई और अगस्त में मौसम की अनिश्चितता बनी रहने की संभावना है।
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