Bhojsala Vivad: मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने शुक्रवार की नमाज के लिए विवादित परिसर के पास उपयुक्त स्थान उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। कोर्ट के आदेश के बाद अब मुस्लिम समुदाय को पहले तय की गई 1.3 किलोमीटर दूर की जगह पर जाने की जरूरत नहीं होगी।
सुप्रीम कोर्ट ने परिसर के पास नमाज की जगह देने का दिया निर्देश
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नमाज के लिए चिन्हित नई जगह विवादित परिसर के बिल्कुल पास है और यह इस उद्देश्य के लिए उपयुक्त दिखाई देती है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में हिंदू और मुस्लिम पक्ष आपसी सहमति से किसी अन्य वैकल्पिक स्थान का चयन करना चाहें, तो इस आदेश से उस पर कोई रोक नहीं होगी।
मुस्लिम पक्ष ने प्रशासन पर आदेश नहीं मानने का लगाया आरोप
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने मामले की सुनवाई की। मुस्लिम पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हुजैफा अहमदी ने दलील देते हुए कहा कि जिला प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट के पहले दिए गए निर्देशों का पूरी तरह पालन नहीं किया। उनका कहना था कि अदालत ने परिसर के भीतर या उसके आसपास नमाज के लिए जगह तय करने को कहा था, लेकिन प्रशासन ने लगभग 1.3 किलोमीटर दूर स्थान आवंटित कर दिया।
2003 की पुरानी व्यवस्था बहाल करने की भी उठी मांग
मुस्लिम पक्ष ने अदालत से वर्ष 2003 से लागू व्यवस्था को फिर से लागू करने की मांग की। उस व्यवस्था के तहत मंगलवार को हिंदू पक्ष भोजशाला में पूजा-अर्चना करता था, जबकि शुक्रवार को मुस्लिम समुदाय जुमे की नमाज अदा करता था। वकील ने कहा कि दूर स्थित स्थान पर नमाज अदा करना व्यावहारिक नहीं है।
नमाज और पूजा के लिए अलग व्यवस्था का भी जिक्र
सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि पहले दिए गए आदेश में शुक्रवार को दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक नमाज के लिए समय निर्धारित करने और हिंदू श्रद्धालुओं के लिए अलग प्रवेश एवं निकास व्यवस्था बनाने की बात कही गई थी, ताकि दोनों समुदाय बिना किसी व्यवधान के अपने धार्मिक कार्य कर सकें।
भोजशाला समिति ने जताई आपत्ति
दूसरी ओर, भोजशाला समिति ने जिला प्रशासन के समक्ष अपनी आपत्ति दर्ज कराई। समिति का कहना है कि भोजशाला भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा संरक्षित ऐतिहासिक स्मारक और धार्मिक महत्व का स्थल है। ऐसे में स्मारक के बेहद निकट नमाज की अनुमति देने से इसकी ऐतिहासिकता और कानून-व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। इसी आधार पर प्रशासन ने पहले दूर स्थान निर्धारित किया था।
कोर्ट ने मांगा साइट प्लान और नक्शा
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने पूरे विवादित क्षेत्र का आधिकारिक साइट प्लान प्रस्तुत करने को कहा। इसके बाद मुस्लिम पक्ष ने जिला प्रशासन द्वारा तैयार नक्शा और गूगल मैप के जरिए अदालत को पूरे क्षेत्र की स्थिति दिखाई। पक्ष ने दलील दी कि दरगाह और भोजशाला परिसर के आसपास पर्याप्त खाली जमीन उपलब्ध है, जहां सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखते हुए नमाज कराई जा सकती है।
प्रशासन को दिए गए स्पष्ट निर्देश
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने जिला प्रशासन को शुक्रवार की नमाज के लिए भोजशाला परिसर के निकट उपयुक्त स्थान उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। अदालत के इस फैसले से नमाज के स्थान को लेकर चल रहा विवाद फिलहाल सुलझता नजर आ रहा है।
ये भी पढ़ें: सावन 2026 की पहली रात करें ये 4 उपाय, दूर होगी आर्थिक परेशानी

