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धर्मेंद्र प्रधान का राहुल गांधी पर हमला, बोले- छात्रों के समाधान नहीं, राजनीतिक सुर्खियां चाहते हैं

Dharmendra Pradhan Rahul Gandhi CJP Protest: ‘चलो संसद’ मार्च के दौरान CJP प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने पहली प्रतिक्रिया देते हुए राहुल गांधी और कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस छात्रों को राजनीतिक हथियार बनाकर संसद के मानसून सत्र में व्यवधान पैदा करने की कोशिश कर रही है, जबकि सरकार NEET पेपर लीक विवाद से जुड़े मुद्दों पर संसद में विस्तृत चर्चा के लिए तैयार है।

प्रधान ने X पर कहा कि राहुल गांधी और कांग्रेस छात्रों का राजनीतिक इस्तेमाल कर मानसून सत्र में जानबूझकर हंगामा खड़ा कर रहे हैं। उनके मुताबिक, सरकार की चर्चा की इच्छा के बावजूद कांग्रेस ने लोकतांत्रिक बहस के बजाय ‘राजनीतिक तमाशे’ को चुना। उन्होंने कहा कि छात्रों को नारे नहीं, बल्कि समाधान, जवाब, सुधार और जवाबदेही चाहिए तथा सरकार परीक्षा प्रणाली को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।

PM आवास के बाहर प्रदर्शन पर सरकार की आपत्ति

20 जुलाई के CJP प्रदर्शन में कथित पुलिस कार्रवाई के विरोध में राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, अखिलेश यादव और अन्य विपक्षी नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास की ओर मार्च किया। प्रदर्शन में कांग्रेस सांसदों के अलावा कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और केरल के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन भी शामिल हुए। दिल्ली पुलिस ने कई नेताओं को हिरासत में लिया, जिन्हें कुछ घंटे बाद छोड़ दिया गया।

सरकारी सूत्रों ने पीएम आवास के बाहर प्रदर्शन को सुरक्षा चिंता बताते हुए इसे ‘गलत और खतरनाक मिसाल’ करार दिया। उनका कहना था कि परिपक्व लोकतंत्रों में नेताओं के घरों को निशाना बनाकर प्रदर्शन नहीं होते और इससे सुरक्षा व्यवस्था को खतरा पैदा हो सकता है।

हिरासत से रिहा होने के बाद प्रियंका गांधी ने कहा कि राहुल गांधी को संसद में बोलने की अनुमति नहीं मिलती और प्रदर्शन की अनुमति भी नहीं दी जाती, इसलिए वे वहां पहुंचे जहां सरकार को इसकी उम्मीद नहीं थी।

CJP के ‘चलो संसद’ मार्च में हिंसा

विवाद की शुरुआत मानसून सत्र के पहले दिन CJP के ‘चलो संसद’ मार्च से हुई थी। दो महीने पुरानी पार्टी ने NEET जैसी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर मार्च निकाला था।

संसद की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को रोकने के दौरान पुलिस ने आंसू गैस और लाठीचार्ज का इस्तेमाल किया। हिंसा में पुलिस बसों के शीशे टूटे, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचा और 70 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया। अधिकारियों के अनुसार, 100 से ज्यादा दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवान घायल हुए, जिनमें पांच से अधिक IPS अधिकारी भी शामिल थे। इस टकराव ने मानसून सत्र के पहले दिन की कार्यवाही पर भी असर डाला।

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Tanisha Verma

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