Dharmendra Pradhan Parliament Statement: पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफे के बाद पहली बार सोमवार को संसद पहुंचे। संसद परिसर में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के सांसदों ने उनका स्वागत किया। इस दौरान कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश के साथ उनकी संक्षिप्त बातचीत ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी। दोनों नेताओं के बीच हुए संवाद की तस्वीर और बातचीत सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है।
जयराम रमेश के तंज पर दिया जवाब
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, संसद पहुंचने पर धर्मेंद्र प्रधान का स्वागत कर रहे सांसदों के बीच कांग्रेस नेता जयराम रमेश भी पहुंचे। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, "ऐसा हो जाता है।" इस पर धर्मेंद्र प्रधान ने तुरंत जवाब दिया, "कुछ नहीं हुआ। मैं सड़क का लड़ाका हूं, वातानुकूलित कमरे में बैठने वाला कार्यकर्ता नहीं। प्रधान के इस जवाब को कई लोग उनके राजनीतिक आत्मविश्वास और विपक्ष के तंज का करारा जवाब मान रहे हैं। यह बातचीत अब सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बनी हुई है।
इस्तीफे के बाद भी आत्मविश्वास बरकरार
संसद पहुंचने के दौरान धर्मेंद्र प्रधान के चेहरे पर मुस्कान दिखाई दी। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के कई सांसदों ने उनका स्वागत करते हुए उनका उत्साह बढ़ाया। इस दौरान कुछ सांसदों ने उनके इस्तीफे को राजनीतिक जवाबदेही का उदाहरण भी बताया। प्रधान के बयान से यह संकेत मिला कि वह इस्तीफे के बावजूद खुद को राजनीतिक रूप से कमजोर नहीं मानते और सार्वजनिक जीवन में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं।
पुराने आंदोलन की भी हो रही चर्चा
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद उनके छात्र जीवन का एक पुराना घटनाक्रम भी चर्चा में है। बताया जा रहा है कि वर्ष 1997 में ओडिशा में कथित प्रश्नपत्र लीक के विरोध में हुए एक प्रदर्शन के दौरान वह छात्र संगठन के साथ आंदोलन का नेतृत्व कर रहे थे। उस समय पुलिस लाठीचार्ज में उन्हें चोट भी लगी थी। अब कई वर्षों बाद शिक्षा मंत्री के रूप में प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक के मुद्दे को लेकर उनके इस्तीफे को इसी संदर्भ में भी देखा जा रहा है।
भारतीय जनता पार्टी ने खुलकर किया समर्थन
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने उनके समर्थन में बयान दिए हैं। पार्टी नेताओं का कहना है कि उनका इस्तीफा किसी व्यक्तिगत आरोप के कारण नहीं, बल्कि नैतिक और राजनीतिक जवाबदेही के तहत लिया गया फैसला है। भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने शिक्षा क्षेत्र में उनके कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने कई सुधारात्मक कदम उठाए और पार्टी भविष्य में भी उनकी भूमिका को महत्वपूर्ण मानती है।
आगे की भूमिका पर बनी हुई हैं निगाहें
राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि आने वाले समय में पार्टी धर्मेंद्र प्रधान को संगठन या किसी अन्य महत्वपूर्ण जिम्मेदारी में भूमिका दे सकती है। हालांकि, इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
इस्तीफे के बाद संसद में धर्मेंद्र प्रधान की मौजूदगी और जयराम रमेश के साथ उनकी संक्षिप्त बातचीत ने राजनीतिक माहौल को गर्मा दिया है। उनके "सड़क का लड़ाका" वाले बयान को समर्थक जहां आत्मविश्वास का प्रतीक बता रहे हैं, वहीं विपक्ष इसे अलग नजरिए से देख रहा है। फिलहाल यह संवाद संसद से लेकर सोशल मीडिया तक चर्चा का विषय बना हुआ है।
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