Dharmendra Pradhan: देश भर में मचे घमासान और तीखे छात्र आंदोलनों के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। NEET-UG 2026 परीक्षा के पेपर लीक और इससे उपजे कड़े विरोध-प्रदर्शनों के बाद उनका यह कदम सामने आया है। मोदी सरकार के पिछले एक दशक के कार्यकाल में यह पहला ऐसा मौका माना जा रहा है, जब किसी कैबिनेट मंत्री को इस तरह सीधे तौर पर जन-दबाव के आगे झुकते हुए अपना पद छोड़ना पड़ा है। आपको बता दें कि सीजेपी के आंदोलन को ज़ेन ज़ी का आंदोलन बताया जा रहा था। अब धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद से माना जा रहा है कि केंद्र सरकार जेन ज़ी के आगे झुक गई है।
युवाओं और देश के विद्यार्थियों के नाम जारी अपने दो पन्नों के त्यागपत्र में धर्मेंद्र प्रधान ने स्पष्ट किया कि वे विद्यार्थियों के वृहद हितों को ध्यान में रखते हुए यह जिम्मेदारी छोड़ रहे हैं, जिससे किसी भी युवा का करियर कानूनी उलझनों या किसी प्रकार के संशय में न पड़े। इसके साथ ही, उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार प्रकट किया और देश की सेवा को अपने जीवन का सर्वोच्च ध्येय बताया।
विवाद की शुरुआत 3 मई 2026 को आयोजित NEET-UG परीक्षा से हुई थी। अनियमितताएं सामने आने के बाद सरकार ने मामले की जांच सीबीआई को सौंपी, परीक्षा रद्द कर दोबारा परीक्षा कराई और अगले साल से इसे पूरी तरह कंप्यूटर-आधारित (CBT) फॉर्मेट में शिफ्ट करने का निर्णय लिया। हालांकि, इसके बावजूद छात्रों का गुस्सा शांत नहीं हुआ। 'कॉक्रोच जनता पार्टी' के नेतृत्व में चले युवा आंदोलन और कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के समर्थन से यह विरोध देशव्यापी बन गया, खासकर तब जब देश भर में 21 छात्रों की आत्महत्या की दुखद खबरों ने इस आंदोलन को और संवेदनशील बना दिया।
स्थिति को नियंत्रित करने और शिक्षा व्यवस्था में जनता का भरोसा बहाल करने के लिए सरकार ने कई कड़े कदम उठाए हैं:
फास्ट-ट्रैक कोर्ट का गठन: परीक्षा में धोखाधड़ी और धांधली के मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए विशेष फास्ट-ट्रैक अदालतों का गठन।
सख्त एंटी-पेपर लीक कानून: परीक्षा में गड़बड़ी रोकने के लिए नया और सख्त विधेयक मंजूर, जिसके तहत संगठित पेपर लीक के मामलों में 10 साल तक की जेल और 10 करोड़ रुपये तक के भारी जुर्माने का प्रावधान।
शिक्षा सचिव में फेरबदल: प्रशासनिक व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए शिक्षा सचिव को बदला गया।
NTA पर बड़ी कार्रवाई: नेशनल टेस्टिंग Agency (NTA) के 47 अधिकारियों को उनके पदों से हटाया गया।
आंदोलनकारियों पर राहत: प्रदर्शन कर रहे छात्रों और युवाओं पर दर्ज मामलों को वापस लेने का फैसला।
पीड़ित परिवारों को मुआवजा: आत्महत्या करने वाले छात्रों के पीड़ित परिवारों के लिए मुआवजे का ऐलान।
सरकार के इन ताबड़तोड़ फैसलों और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाने की दिशा में एक बड़ा मोड़ माना जा रहा है। आने वाले हफ्तों में NTA की कार्यप्रणाली को लेकर और भी बड़े सुधार देखने को मिल सकते हैं।
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