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भारत में ड्रोन डिलीवरी का नया दौर: क्या आसमान से होगी सामान की डिलीवरी?

by | Jul 5, 2026 | Cover Story Big

Drone Delivery India: जो तकनीक कभी भविष्य का सपना लगती थी, वह अब भारत में हकीकत बन रही है। देश के कई हिस्सों में ड्रोन दवाइयां, मेडिकल सैंपल, पार्सल और ई-कॉमर्स ऑर्डर पहुंचा रहे हैं। Drone Rules 2021, डिजिटल स्काई प्लेटफॉर्म, पीएलआई योजना और BVLOS (Beyond Visual Line of Sight) ट्रायल्स ने इस क्षेत्र को प्रयोगों से निकालकर सीमित व्यावसायिक संचालन तक पहुंचा दिया है। अनुमान है कि 2033 तक भारत का लॉजिस्टिक्स बाजार लगभग दोगुना हो सकता है और ड्रोन इसमें अहम भूमिका निभाएंगे।

ड्रोन डिलीवरी क्यों बन रही है जरूरी?

एडजिस्टिफाई के सह-संस्थापक एवं सीईओ उमंग शुक्ला का कहना है कि ड्रोन अब केवल प्रयोग नहीं, बल्कि लॉजिस्टिक्स का भरोसेमंद विकल्प बन रहे हैं। उनके अनुसार, चयनित BVLOS कॉरिडोर को मंजूरी मिल चुकी है और कई कंपनियां वास्तविक स्तर पर स्वायत्त डिलीवरी कर रही हैं। ट्रैफिक और खराब सड़कों से प्रभावित न होने के कारण दवाइयों, डायग्नोस्टिक्स और समय-संवेदनशील डिलीवरी में ड्रोन खासतौर पर उपयोगी हैं।

क्विक कॉमर्स और ग्रामीण भारत को मिलेगा फायदा

10 मिनट ग्रोसरी और उसी दिन डिलीवरी की बढ़ती मांग ने पारंपरिक डिलीवरी मॉडल पर लागत का दबाव बढ़ाया है। रेडसीर के मुताबिक भारत का क्विक-कॉमर्स बाजार 10 अरब डॉलर GMV पार कर चुका है और 3 करोड़ से ज्यादा मासिक उपभोक्ता हैं। स्काई एयर मोबिलिटी के सीईओ अंकित कुमार का कहना है कि ड्रोन ईंधन, वेतन, बीमा और वाहन रखरखाव जैसी लागत कम कर सकते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार सबसे बड़ा लाभ ग्रामीण और छोटे शहरों को मिलेगा, जहां सड़क संपर्क कमजोर है। नए पोस्टल ड्रोन रूट्स के जरिए दवाइयां, प्रमाणित दस्तावेज, शिशु पोषण उत्पाद और कृषि सामग्री दूरदराज के इलाकों तक पहुंचाई जा सकती है। IBEF के अनुसार भारत के लगभग 60% ऑनलाइन ऑर्डर अब टियर-2 और छोटे शहरों से आते हैं।

चुनौतियां भी कम नहीं

बैटरी की सीमित क्षमता, कम पेलोड, खराब मौसम, विशेषकर मानसून, ऊंची इमारतें, बिजली की लाइनें और प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र बड़े अवरोध हैं। इसके अलावा ड्रोन पंजीकरण, टाइप सर्टिफिकेशन, बीमा, स्वीकृत एयर कॉरिडोर और एयरस्पेस नियमों का पालन जरूरी है। विशेषज्ञ मानते हैं कि घनी आबादी वाले शहरों में बड़े पैमाने पर रिटेल ड्रोन डिलीवरी में अभी कई साल लग सकते हैं।

क्या ड्रोन डिलीवरी बॉय की जगह ले लेंगे?

फिलहाल इसकी संभावना नहीं है। डिलीवरी कर्मी पता सत्यापित करने, कैश-ऑन-डिलीवरी, ग्राहक सहायता और जटिल अपार्टमेंट तक पहुंचने जैसे काम करते हैं, जिन्हें ड्रोन नहीं कर सकते। इसलिए विशेषज्ञ मानते हैं कि ड्रोन और इंसानी डिलीवरी साथ-साथ काम करेंगे। हालांकि रिमोट पायलट, मेंटेनेंस इंजीनियर, बैटरी मैनेजमेंट, फ्लीट मॉनिटरिंग, सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट और एयर ट्रैफिक कोऑर्डिनेशन जैसे नए रोजगार भी पैदा होंगे। श्रम विशेषज्ञों का कहना है कि कंपनियों को इस बदलाव के दौरान कर्मचारियों के हितों का भी ध्यान रखना होगा।

दुनिया से मिले सबक और पर्यावरण पर असर

अमेरिका में Amazon Prime Air और Wing, रवांडा-घाना में Zipline तथा चीन में JD.com और Meituan ड्रोन डिलीवरी का सफल परीक्षण कर चुके हैं। लेकिन इन देशों में भी ड्रोन पारंपरिक डिलीवरी का विकल्प नहीं, बल्कि पूरक बने हैं। भारत भी इसी मॉडल पर आगे बढ़ रहा है। दिल्ली-एनसीआर और हैदराबाद के पायलट प्रोजेक्ट्स बताते हैं कि पेट्रोल चालित दोपहिया वाहनों की जगह ड्रोन इस्तेमाल करने से प्रदूषण कम हो सकता है, हालांकि इसका वास्तविक लाभ बिजली के स्रोत, बैटरी निर्माण और संचालन के पैमाने पर निर्भर करेगा।

भारत में ड्रोन डिलीवरी अब भविष्य नहीं, वर्तमान की तकनीक बन रही है, लेकिन इसका व्यापक विस्तार नियमों, बुनियादी ढांचे और आर्थिक व्यवहार्यता पर निर्भर करेगा।

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