दुनिया के 26 देशों की 1.11 लाख से अधिक महिलाओं पर किए गए एक नए अध्ययन में पाया गया है कि 40 वर्ष से पहले मेनोपॉज होने वाली महिलाओं में हार्ट अटैक, स्ट्रोक और अन्य गंभीर हृदय रोगों का खतरा काफी बढ़ जाता है। द लैंसेट ऑब्स्टेट्रिक्स, गायनेकोलॉजी एंड वुमेन्स हेल्थ में प्रकाशित इस अध्ययन के अनुसार, 40 से 44 वर्ष की उम्र में मेनोपॉज होने वाली महिलाओं में सामान्य आयु (45 वर्ष या उससे अधिक) में मेनोपॉज वाली महिलाओं की तुलना में हृदय रोगों का जोखिम 30-40 प्रतिशत अधिक है।
अध्ययन में शामिल 7,872 भारतीय महिलाओं में से 1,445 (18.4%) में प्रीमैच्योर मेनोपॉज पाया गया, जबकि 1,991 (25.3%) महिलाओं में 40-44 वर्ष के बीच अर्ली मेनोपॉज हुआ। इस तरह 43.6 प्रतिशत महिलाओं में या तो समय से पहले या अपेक्षाकृत जल्दी मेनोपॉज देखा गया। भारतीय महिलाओं में मेनोपॉज की औसत उम्र 44.6 वर्ष रही। शोध में यह भी सामने आया कि दक्षिण एशिया और निम्न एवं मध्यम आय वाले देशों की महिलाओं में विकसित देशों की तुलना में मेनोपॉज कम उम्र में होता है।
PHFI के चांसलर डॉ. के. श्रीनाथ रेड्डी के मुताबिक, मेनोपॉज से पहले महिला सेक्स हार्मोन रक्त में वसा, शरीर में फैट के वितरण, सूजन संबंधी कारकों और रक्त वाहिकाओं की कार्यप्रणाली को प्रभावित कर हृदय को सुरक्षा प्रदान करते हैं। मेनोपॉज के बाद यह सुरक्षा कम हो जाती है और हार्ट अटैक का खतरा पुरुषों के बराबर पहुंच सकता है।
ये निष्कर्ष PURE अध्ययन पर आधारित हैं, जिसमें 28 देशों की 35-70 वर्ष आयु वर्ग की 1.25 लाख से अधिक महिलाओं का विश्लेषण किया गया। INTERHEART स्कोर के जरिए धूम्रपान, लिपिड स्तर, हाई ब्लड प्रेशर, मधुमेह, मोटापा, खानपान, शारीरिक गतिविधि, शराब सेवन और मनोवैज्ञानिक कारकों जैसे जोखिमों का मूल्यांकन किया गया, जो वैश्विक स्तर पर हार्ट अटैक के 90 प्रतिशत से अधिक मामलों के लिए जिम्मेदार माने जाते हैं।
60,669 रजोनिवृत्त महिलाओं में 9.5 प्रतिशत में प्रीमैच्योर और 15.3 प्रतिशत में अर्ली मेनोपॉज पाया गया। वैश्विक स्तर पर मेनोपॉज की औसत आयु 47.4 वर्ष थी, जबकि दक्षिण एशिया में यह 44.7 वर्ष और निम्न आय वाले देशों में 44.8 वर्ष रही। यूरोप और उच्च आय वाले देशों में यह क्रमशः 47.8 और 48 वर्ष थी।
डॉ. रेड्डी के अनुसार, तनाव, धूम्रपान, खराब आहार, अपर्याप्त नींद, बहुत कम या अत्यधिक शारीरिक गतिविधि, पर्यावरणीय प्रदूषण, बढ़ती गर्मी, डायबिटीज और यहां तक कि सेकेंड हैंड स्मोक भी समय से पहले मेनोपॉज का कारण बन सकते हैं। उन्होंने कहा कि न्यूरो-एंडोक्राइन और गट-ब्रेन एक्सिस भी भोजन और पर्यावरणीय प्रभावों के कारण मेनोपॉज के समय को प्रभावित कर सकते हैं। स्वस्थ जीवनशैली और सार्वजनिक नीतियों के जरिए इन जोखिमों को कम किया जा सकता है।
सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ अरुंधति मुरलीधरन के अनुसार, एनीमिया, कम उम्र में विवाह, बार-बार गर्भधारण और पोषण की स्थिति जैसे कारक भी मेनोपॉज की उम्र को प्रभावित कर सकते हैं, हालांकि इस पर और शोध की आवश्यकता है। उनका कहना है कि भारत में डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और हृदय रोगों से जुड़े मौजूदा कार्यक्रमों में मेनोपॉज स्क्रीनिंग और जागरूकता को शामिल कर जोखिम वाली महिलाओं की पहचान की जा सकती है। इससे केवल मेनोपॉज के लक्षणों का प्रबंधन ही नहीं, बल्कि महिलाओं में स्वस्थ उम्र बढ़ने को भी बढ़ावा मिलेगा।
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