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ब्रिगेडियर बनकर घूम रहा था 21 साल का आर्यन, एक चूक ने पहुंचाया सलाखों के पीछे

Fake Brigadier: उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने सेना के अधिकारियों से लेकर पुलिस तक को हैरान कर दिया। महज 21 साल का एक युवक खुद को भारतीय सेना का ब्रिगेडियर बताकर न सिर्फ लोगों के बीच रौब झाड़ रहा था, बल्कि वह कई हफ्तों तक सैन्य अधिकारी की तरह घूमता भी रहा। लग्जरी एसयूवी, सेना का झंडा, वर्दी, फर्जी पहचान पत्र और सुरक्षा में कथित 'कमांडो' सब कुछ ऐसा था कि आम लोगों को उस पर शक तक नहीं हुआ। लेकिन एक छोटी सी चूक ने उसकी पूरी कहानी उजागर कर दी और आखिरकार वह सेना के बिछाए जाल में फंस गया। मामले का मुख्य आरोपी आर्यन वर्मा है, जिसकी उम्र केवल 21 वर्ष बताई जा रही है। जांच में सामने आया कि वह पिछले कई सप्ताह से खुद को भारतीय सेना का वरिष्ठ अधिकारी बताकर घूम रहा था। सेना को उसकी गतिविधियों की जानकारी मिलने के बाद उस पर नजर रखी जाने लगी और फिर एक विशेष योजना के तहत उसे पकड़ लिया गया।

कौन है आर्यन वर्मा

रिपोर्ट्स के अनुसार आर्यन वर्मा मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET की तैयारी कर चुका था और उसका सपना सेना में डॉक्टर बनने का था। लेकिन परीक्षा में सफलता नहीं मिलने के बाद उसने अपने परिवार और परिचितों के सामने खुद को सेना से जुड़ा अधिकारी बताना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे यह झूठ इतना बड़ा हो गया कि उसने ब्रिगेडियर की वर्दी तक तैयार करवा ली और उसी पहचान के साथ लोगों के बीच आने-जाने लगा। बताया जा रहा है कि उसने अपने निजी वाहन को भी सैन्य अधिकारी की गाड़ी जैसा रूप दे दिया था। वाहन पर सेना से जुड़े प्रतीक और झंडे लगाए गए थे, जिससे लोगों को उसके दावों पर आसानी से विश्वास हो जाता था।

साथ में घूमते थे 'NSG कमांडो'

इस मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि आर्यन अपने साथ दो लोगों को भी रखता था, जिन्हें वह एनएसजी कमांडो बताता था। जांच में पता चला कि वे वास्तविक कमांडो नहीं थे, बल्कि निजी तौर पर रखे गए बाउंसर थे। उनकी मौजूदगी से लोगों को यह विश्वास हो जाता था कि आर्यन वास्तव में कोई बड़ा सैन्य अधिकारी है।

आखिर कैसे हुआ शक

सेना के अधिकारियों को पिछले कुछ समय से सूचना मिल रही थी कि बेहद कम उम्र का एक युवक ब्रिगेडियर की वर्दी में विभिन्न स्थानों पर देखा जा रहा है। शुरुआत में इसकी पुष्टि नहीं हो सकी, लेकिन लगातार मिल रही सूचनाओं के बाद सैन्य अधिकारियों ने उसकी गतिविधियों पर नजर रखनी शुरू कर दी। अधिकारियों को यह बात भी असामान्य लगी कि इतनी कम उम्र में किसी का ब्रिगेडियर जैसे वरिष्ठ पद पर पहुंचना लगभग असंभव है। भारतीय सेना में इस रैंक तक पहुंचने के लिए वर्षों की सेवा और अनुभव की आवश्यकता होती है। इसी वजह से संदेह और गहरा हो गया।

एक गलती और बिछ गया जाल

आर्यन की सबसे बड़ी गलती यह रही कि वह अपने दिखावे और पहचान को लेकर जरूरत से ज्यादा आत्मविश्वासी हो गया। सेना ने उसे पकड़ने के लिए एक विशेष योजना बनाई। अधिकारियों ने आम नागरिक बनकर एक कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने का निमंत्रण भेजा। आर्यन ने बिना किसी संदेह के यह निमंत्रण स्वीकार कर लिया और पूरी वर्दी तथा अपने कथित सुरक्षा दस्ते के साथ कार्यक्रम स्थल पर पहुंच गया। जैसे ही वह कार्यक्रम में पहुंचा, पहले से तैयार सेना के अधिकारियों ने उसे हिरासत में ले लिया। इस कार्रवाई के दौरान उसके पास से कई संदिग्ध और फर्जी सामान बरामद किए गए।

क्या-क्या हुआ बरामद

जांच के दौरान आर्यन के पास से फर्जी सैन्य पहचान पत्र, सेना से जुड़े बैज, नकली दस्तावेज, एक एयर पिस्टल, विजिटिंग कार्ड और अन्य सामग्री बरामद की गई। अधिकारियों को कुछ ऐसे दस्तावेज भी मिले, जिनका इस्तेमाल वह अपनी पहचान को असली साबित करने के लिए करता था। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि उसने यह सामग्री कहां से हासिल की और क्या इस मामले में कोई अन्य व्यक्ति भी शामिल है।

क्यों चर्चा में है यह मामला

यह मामला सिर्फ फर्जीवाड़े का नहीं, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ा भी माना जा रहा है। एक युवक का इतने लंबे समय तक सेना के वरिष्ठ अधिकारी का रूप धारण कर घूमना कई सवाल खड़े करता है। साथ ही यह घटना बताती है कि दिखावे और प्रतीकों के आधार पर लोगों का विश्वास हासिल करना कितना आसान हो सकता है।

21 वर्षीय आर्यन वर्मा की कहानी किसी फिल्मी पटकथा जैसी लग सकती है, लेकिन हकीकत में यह एक गंभीर मामला है। सेना के वरिष्ठ अधिकारी का फर्जी रूप धारण कर लोगों को भ्रमित करने वाला यह युवक आखिरकार अपनी ही एक गलती की वजह से पकड़ा गया। फिलहाल मामले की जांच जारी है और सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस पूरे नेटवर्क के पीछे कोई बड़ा गिरोह तो नहीं है।

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Lavanya Dayal

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