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एक लाख का कैंसर इंजेक्शन निकला पानी, दिल्ली में नकली दवाओं के रैकेट का खुलासा

by | Aug 26, 2026 | Trending

Fake Cancer Medicine Racket: दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने कैंसर की महंगी दवाओं की कथित कालाबाजारी से जुड़े एक बड़े नेटवर्क का खुलासा किया है। जांच में सामने आया कि ब्लैक मार्केट में करीब एक लाख रुपये में बिक रहे एवालुमैब इंजेक्शन के कुछ नमूनों में कैंसर के इलाज के लिए जरूरी मूल इंग्रीडिएंट नहीं था। जांच के दौरान कंपनी के माध्यम से जर्मनी की मर्क लैब में कराए गए परीक्षण में इसमें केवल पानी होने की बात सामने आई। पुलिस के मुताबिक, यह कथित रैकेट करीब 9 करोड़ रुपये का था और इसका नेटवर्क दिल्ली-एनसीआर समेत कई राज्यों तक फैला हुआ था। मामले में अब तक 17 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

588 एंटी-कैंसर वायल बरामद

क्राइम ब्रांच ने कार्रवाई के दौरान 588 भरे हुए एंटी-कैंसर वायल, छह खाली वायल, सात खाली दवा के बॉक्स और अन्य दवाओं की 3,021 यूनिट बरामद की हैं। पुलिस को करीब 50 लाख रुपये नकद भी मिले हैं। बरामद दवाओं में डार्जालेक्स, इमफिंजी, एरबिटक्स, ऑपडाइटा, गाजीवा, बावेन्सियो, एडसेट्रिस और कीट्रूडा जैसी महंगी दवाएं शामिल हैं। पुलिस का आरोप है कि गिरोह में नकली दवाओं के अलावा अस्पतालों और सरकारी संस्थानों से कथित तौर पर बाहर निकाली गई कैंसर की दवाओं की भी सप्लाई की जाती थी।

तीन रास्तों से आती थीं दवाएं

जांच के अनुसार, सिंडिकेट तक दवाएं तीन तरीकों से पहुंचती थीं। इनमें नकली दवाओं की खरीद, अस्पतालों में मरीजों के लिए रखी दवाओं की कथित हेराफेरी और सरकारी सप्लाई से दवाओं को बाहर निकालना शामिल था। इसके बाद दवाओं को बिना जरूरी दस्तावेजों के अलग-अलग ठिकानों पर रखा जाता और बिचौलियों के जरिए आगे भेजा जाता था।

असली पैकिंग में नकली दवा का खेल

पुलिस के मुताबिक, आरोपी असली कार्टन और खाली दवा के बॉक्स संभालकर रखते थे। बैच नंबर, एमआरपी और पहचान से जुड़ी जानकारी मिटाकर दवाओं को नए तरीके से पैक किया जाता था। इसके लिए थर्मोकोल, बबल रैप, टेप और पॉलीथीन जैसी सामग्री का इस्तेमाल किया जाता था। पुलिस को लेनदेन से जुड़े रजिस्टर और डायरी भी मिली हैं। नेटवर्क में दिल्ली के अलावा नोएडा, गुरुग्राम, गाजियाबाद, फरीदाबाद, झज्जर, मुंबई और हैदराबाद से जुड़े लोगों के शामिल होने की बात सामने आई है।

अब पूरे नेटवर्क की जांच

पुलिस के अनुसार, 22 जून को मिली सूचना के बाद जांच शुरू की गई थी। 11 जुलाई को दिल्ली और नवी मुंबई में छापेमारी की गई, जिसके बाद पूछताछ और तलाशी के आधार पर गिरफ्तारियां हुईं। इस मामले में 12 जुलाई को क्राइम ब्रांच थाने में एफआईआर दर्ज की गई। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि यह कथित नेटवर्क कितने समय से सक्रिय था, नकली दवाएं कितने मरीजों तक पहुंचीं और इसमें कुल कितने लोग शामिल हैं।

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