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वो 5 आंदोलन जिसने हिला दी सत्ता की नींव, जंतर-मंतर से सड़क तक गूंजा विरोध का स्वर

by | Jul 21, 2026 | Explainer, देश

Biggest Indian Protests: भारत में लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत जनता की आवाज मानी जाती है। देश के इतिहास में कई ऐसे आंदोलन हुए हैं, जिन्होंने न सिर्फ सरकारों का ध्यान खींचा बल्कि नीतियों और राजनीतिक समीकरणों पर भी गहरा असर डाला। कभी भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठी तो कभी किसानों, छात्रों और महिलाओं के अधिकारों को लेकर लोग सड़कों पर उतरे। दिल्ली का जंतर-मंतर, रामलीला मैदान और प्रधानमंत्री आवास के आसपास के इलाके ऐसे कई बड़े प्रदर्शनों के गवाह रहे हैं। हाल ही में कांग्रेस नेताओं ने छात्रों से जुड़े मुद्दे को लेकर प्रधानमंत्री आवास तक मार्च निकाला। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और मल्लिकार्जुन खड़गे समेत कई नेता धरने पर बैठे और सरकार से जवाब की मांग की। इस प्रदर्शन ने एक बार फिर देश में बड़े आंदोलनों की भूमिका को चर्चा में ला दिया है।

आइए जानते हैं भारत के वो 5 बड़े आंदोलन, जिन्होंने सत्ता और व्यवस्था पर बड़ा प्रभाव डाला।

अन्ना हजारे का जन लोकपाल आंदोलन (2011)

साल 2011 में भ्रष्टाचार के खिलाफ शुरू हुआ अन्ना हजारे का आंदोलन देशभर में चर्चा का केंद्र बन गया था। अन्ना हजारे ने दिल्ली के जंतर-मंतर से अनशन शुरू किया था, जिसके बाद यह आंदोलन बड़े जन आंदोलन में बदल गया। इस आंदोलन की मुख्य मांग थी कि भ्रष्टाचार पर रोक लगाने के लिए मजबूत लोकपाल कानून बनाया जाए। बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतरे और सरकार पर दबाव बढ़ा। इस आंदोलन से देश की राजनीति में बड़ा बदलाव आया और बाद में आम आदमी पार्टी के गठन की पृष्ठभूमि भी तैयार हुई।

निर्भया कांड के बाद देशव्यापी विरोध प्रदर्शन (2012)

दिसंबर 2012 में दिल्ली में हुए निर्भया कांड के बाद देशभर में गुस्सा देखने को मिला। हजारों लोग इंडिया गेट, जंतर-मंतर और दिल्ली की सड़कों पर उतर आए। इस आंदोलन में लोगों ने महिलाओं की सुरक्षा, कड़े कानून और न्याय की मांग की। भारी जन दबाव के बाद सरकार ने कानूनों में बदलाव के लिए कदम उठाए और महिलाओं से जुड़े अपराधों पर सख्त प्रावधान किए गए।

नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ आंदोलन (2019-20)

साल 2019 में नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ देश के कई हिस्सों में प्रदर्शन हुए। दिल्ली का शाहीन बाग आंदोलन इस विरोध का प्रमुख केंद्र बना, जहां लंबे समय तक धरना चला। इस आंदोलन में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए और नागरिकता कानून को लेकर देशभर में राजनीतिक बहस तेज हो गई। जंतर-मंतर समेत दिल्ली के कई स्थानों पर भी प्रदर्शन हुए।

किसान आंदोलन (2020-21)

केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों के विरोध में शुरू हुआ किसान आंदोलन देश के सबसे लंबे आंदोलनों में से एक रहा। पंजाब, हरियाणा और अन्य राज्यों के हजारों किसान दिल्ली की सीमाओं पर पहुंचे और लंबे समय तक प्रदर्शन किया। सिंघु, टिकरी और गाजीपुर बॉर्डर आंदोलन के प्रमुख केंद्र बने। किसानों की मांगों के बाद केंद्र सरकार ने तीनों कृषि कानून वापस लेने का फैसला किया।

पहलवानों का आंदोलन (2023)

साल 2023 में देश के कई शीर्ष पहलवान दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरने पर बैठे। इसमें विनेश फोगाट, साक्षी मलिक और बजरंग पूनिया जैसे खिलाड़ी शामिल थे। पहलवानों ने भारतीय कुश्ती महासंघ के तत्कालीन अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ आरोप लगाए और कार्रवाई की मांग की। यह आंदोलन लंबे समय तक सुर्खियों में रहा और खेल जगत से जुड़े मुद्दों पर राष्ट्रीय बहस छेड़ दी।

अब PM आवास तक पहुंचा विरोध का स्वर

हालिया दिनों में कांग्रेस ने छात्रों से जुड़े मुद्दे को लेकर दिल्ली में बड़ा प्रदर्शन किया। पार्टी नेताओं ने प्रधानमंत्री आवास तक मार्च निकाला और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे, संसद में चर्चा और सरकार से जवाब की मांग की। कई नेताओं को पुलिस ने हिरासत में भी लिया। इससे पहले भी दिल्ली में कई बार ऐसे प्रदर्शन हुए हैं, जहां विपक्ष और सामाजिक संगठनों ने सरकार तक अपनी आवाज पहुंचाने की कोशिश की। जंतर-मंतर लंबे समय से लोकतांत्रिक विरोध का प्रमुख केंद्र रहा है।

भारत में आंदोलन सिर्फ विरोध का माध्यम नहीं रहे हैं, बल्कि कई बार उन्होंने सरकारों को फैसलों पर दोबारा विचार करने के लिए मजबूर किया है। लोकतंत्र में जनता की आवाज और शांतिपूर्ण प्रदर्शन व्यवस्था को जवाबदेह बनाने का एक महत्वपूर्ण जरिया माने जाते हैं। आने वाले समय में भी बड़े मुद्दों पर ऐसे आंदोलनों की भूमिका भारतीय राजनीति में अहम बनी रह सकती है।

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