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वायरल वीडियो से लेकर ट्रैवल अलर्ट तक, जेजू आइलैंड विवाद में भारत की सख़्त एडवाइज़री, जानिए पूरा मामला

Indian Embassy Advisory: साउथ कोरिया के मशहूर टूरिस्ट डेस्टिनेशन Jeju Island को लेकर उस वक्त हड़कंप मच गया, जब भारतीय कंटेंट क्रिएटर Sachin Awasthi ने अपने साथ हुए कथित “डिटेंशन” अनुभव का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया। वीडियो के वायरल होते ही भारत सरकार हरकत में आई और Seoul स्थित भारतीय दूतावास ने भारतीय यात्रियों के लिए एक विस्तृत ट्रैवल एडवाइज़री जारी कर दी।

क्या है पूरा विवाद?

सचिन अवस्थी ने इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर दावा किया कि Jeju International Airport पर उतरते ही उन्हें और उनकी पत्नी को इमिग्रेशन अधिकारियों ने रोक लिया। उनके अनुसार, दोनों को एक ऐसी जगह ले जाया गया जो “डिटेंशन सेंटर” जैसी थी जहां न धूप थी, न ठीक से पानी, और माहौल जेल जैसा था। अवस्थी ने यह भी आरोप लगाया कि वहां मौजूद कुछ अधिकारियों का व्यवहार अमानवीय था और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने वाला लगा।

वीडियो में उन्होंने बताया कि घंटों तक उन्हें यह नहीं बताया गया कि आगे क्या होगा। कथित तौर पर महंगे रिटर्न टिकट बुक कराने का दबाव भी डाला गया। बाद में, China के रास्ते लौटते समय भी उन्हें निगरानी, बातचीत पर रोक और बुनियादी सुविधाओं की कमी का सामना करना पड़ा।

भारतीय दूतावास की प्रतिक्रिया

वीडियो वायरल होने के बाद, Embassy of India in Seoul ने स्पष्ट किया कि जेजू की वीज़ा वेवर स्कीम केवल शॉर्ट-टर्म टूरिज़्म के लिए है और यह एंट्री की गारंटी नहीं देती। अंतिम फैसला कोरियाई इमिग्रेशन अधिकारी लेते हैं। दूतावास ने भारतीय नागरिकों को चेताया कि अगर वे अपना ट्रैवल प्लान स्पष्ट नहीं कर पाते या दस्तावेज़ पूरे नहीं होते, तो उन्हें एंट्री से मना किया जा सकता है और अगली उपलब्ध फ्लाइट से वापस भेजा जा सकता है।

यात्रा से पहले ये दस्तावेज़ ज़रूरी

एडवाइज़री में कहा गया है कि जेजू जाने वाले भारतीय यात्री प्रिंटेड कॉपी (सिर्फ मोबाइल स्क्रीनशॉट नहीं) साथ रखें:

• कन्फर्म्ड रिटर्न एयर टिकट
• पूरे स्टे के होटल बुकिंग
• दिन-प्रतिदिन का ट्रैवल आइटिनरी
• पर्याप्त फंड का प्रमाण (बैंक स्टेटमेंट/फॉरेक्स/इंटरनेशनल कार्ड)
• कम से कम 6 महीने वैध पासपोर्ट
• ट्रैवल इंश्योरेंस (ज़ोरदार सिफारिश)
• रहने की जगह के कॉन्टैक्ट डिटेल्स

इमिग्रेशन इंटरव्यू और चेतावनी

इमिग्रेशन पर इंटरव्यू के दौरान यात्रियों को शांत, सहयोगी और स्पष्ट जवाब देने की सलाह दी गई है। एडवाइज़री में यह भी साफ किया गया कि जेजू वीज़ा छूट के तहत मुख्य भूमि साउथ कोरिया की यात्रा गैरकानूनी है। नियम तोड़ने, ओवरस्टे या अनधिकृत गतिविधियों पर भविष्य में यात्रा प्रतिबंध लग सकता है।

अगर एंट्री से मना हो जाए तो?

ऐसी स्थिति में यात्रियों को उसी एयरलाइन की अगली उपलब्ध फ्लाइट से लौटाया जाएगा। फ्लाइट शेड्यूल के कारण कुछ समय के लिए होल्डिंग फैसिलिटी में रखा जा सकता है। दूतावास ने यह भी स्पष्ट किया कि वह कोरियाई इमिग्रेशन के फैसलों को पलट नहीं सकता, लेकिन मानवीय सहायता के लिए संपर्क किया जा सकता है।

एक वायरल वीडियो ने जेजू यात्रा की हकीकत पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। यह मामला भारतीय यात्रियों के लिए सबक है कि वीज़ा छूट का मतलब बिना शर्त एंट्री नहीं। पूरी तैयारी, साफ दस्तावेज़ और नियमों की समझ ही सुरक्षित और परेशानी-मुक्त यात्रा की कुंजी है।

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Shagun Chaurasia

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