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लीबिया के तानाशाह रहे गद्दाफी के बेटे सैफ की घर में गोली मारकर हत्या, गद्दाफी के 8 बेटों में से सैफ था सबसे चर्चित

Saif al-Islam Gaddafi killed by gunfire: लीबिया में सैफ अल-इस्लाम गद्दाफी की गोली मारकर हत्या कर दी गई है। इसकी पुष्टि उनके वकील खालिद अल जायदी ने की है। बता दें कि सैफ अल-इस्लाम गद्दाफी लीबिया के तानाशाह रहे मुअम्मर गद्दाफी के 8 बेटे और एक बेटी में से सबसे चर्चित था।

अपने पिता का राजनीतिक उत्तराधिकारी था सैफ

53 वर्षीय सैफ अल-इस्लाम को लीबिया में कभी अपने पिता का उत्तराधिकारी माना जाता था। उनका जन्म 25 जून 1972 को त्रिपोली में हुआ। गद्दाफी परिवार लीबिया में दशकों तक सत्ता में रहा और सैफ अल-इस्लाम उसी ताकतवर परिवार का सबसे पढ़ा-लिखा और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जाना-पहचाना चेहरा थे। उन्होंने लीबिया के बाहर भी पढ़ाई की और लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से शिक्षा ली। 2000 के दशक में वे खुद को एक सुधारवादी नेता के रूप में पेश करते थे। वे पश्चिमी देशों से रिश्ते सुधारने, अर्थव्यवस्था और कुछ हद तक राजनीतिक बदलाव की बातें करते थे। इसी वजह से कई विदेशी नेता और मीडिया उन्हें गद्दाफी शासन का नरम और आधुनिक चेहरा मानने लगे थे।

11 साल पहले कोर्ट ने सैफ को मौत की सजा सुनाई थी

2011 में अरब स्प्रिंग के दौरान लीबिया में विद्रोह हुआ, जो गद्दाफी शासन के खिलाफ था। सैफ अल-इस्लाम ने अपने पिता का साथ दिया और विद्रोहियों को कुचलने की कोशिश की। वे टीवी पर आए और लोगों को चेतावनी दी कि विरोध करने वालों को सजा मिलेगी। तब उन्होंने कहा था, "हम लीबिया में लड़ेंगे, यहीं मरेंगे।" क्रांति के दौरान उनके पिता मारे गए और सैफ अल-इस्लाम भागने की कोशिश में पकड़े गए। नवंबर 2011 में उन्हें जिंटान शहर के मिलिशिया ने गिरफ्तार कर लिया। 2015 में लीबियन कोर्ट ने उन्हें मौत की सजा सुनाई।

2017 में माफी के बाद सैफ रिहा हुए

अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय (ICC) ने उन पर युद्ध अपराधों के आरोप लगाए। उन पर आरोप लगे कि उन्होंने अपने पिता की सरकार के साथ मिलकर आम नागरिकों के खिलाफ हिंसा और दमन में भूमिका निभाई। सैफ को 2017 तक जिंटान में कैद रखा गया। हालांकि, 2017 में एक आम माफी के तहत उन्हें रिहा कर दिया गया।

2021 में राष्ट्रपति चुनाव में उम्मीदवारी घोषित की थी

सैफ ने 2021 में उन्होंने लीबिया के राष्ट्रपति चुनाव में उम्मीदवारी घोषित की, जो काफी विवादास्पद थी। कई लोग उन्हें गद्दाफी शासन के अपराधों के लिए जिम्मेदार मानते थे, इसलिए चुनाव टल गया। वे पॉपुलर फ्रंट फॉर द लिबरेशन ऑफ लीबिया (PFLL) पार्टी से जुड़े थे।

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Anamika Anand

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