Germany Heatwave Deaths: यूरोप में इस साल भीषण गर्मी का असर लगातार देखने को मिल रहा है। बढ़ते तापमान और लंबे समय तक चल रही हीटवेव ने कई देशों में लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। इसी बीच जर्मनी में गर्मी से जुड़ी मौतों को लेकर चिंताजनक आंकड़े सामने आए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, इस साल अब तक जर्मनी में लगभग 9,800 लोगों की मौत गर्मी से संबंधित कारणों से होने का अनुमान लगाया गया है। जर्मनी में तापमान कई इलाकों में 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया, जिससे स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है।
बुजुर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित
जर्मनी के स्वास्थ्य संस्थान रॉबर्ट कोच इंस्टीट्यूट (RKI) की रिपोर्ट के अनुसार, गर्मी से होने वाली मौतों में सबसे अधिक संख्या 75 वर्ष या उससे ज्यादा उम्र के बुजुर्गों की रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि अधिक उम्र के लोगों में शरीर का तापमान नियंत्रित करने की क्षमता कम हो जाती है, जिससे वे तेज गर्मी और लू की चपेट में जल्दी आ जाते हैं। इसके अलावा पहले से स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे लोगों के लिए भी अत्यधिक तापमान खतरनाक साबित हो सकता है।
यूरोप के कई देशों में रिकॉर्ड गर्मी
इस साल जून के आखिरी सप्ताह में यूरोप के कई देशों में तापमान ने नए रिकॉर्ड बनाए। फ्रांस, स्पेन, ब्रिटेन और अन्य यूरोपीय देशों में भीषण गर्मी और लू का असर देखने को मिला। कई क्षेत्रों में तापमान सामान्य से काफी अधिक दर्ज किया गया। गर्मी के कारण बिजली की मांग बढ़ी और कुछ जगहों पर बिजली आपूर्ति को लेकर भी दबाव की स्थिति बनी।
जलवायु परिवर्तन से बढ़ रहा खतरा
वैज्ञानिकों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण दुनिया भर में हीटवेव की घटनाएं ज्यादा बार और ज्यादा तीव्र हो रही हैं। लंबे समय तक रहने वाली गर्मी न केवल लोगों के स्वास्थ्य पर असर डाल रही है, बल्कि पर्यावरण और बुनियादी ढांचे के लिए भी चुनौती बन रही है। यूरोपीय देशों की सरकारें अब लोगों को गर्मी से बचाव के लिए जागरूक करने और आपातकालीन व्यवस्थाओं को मजबूत करने पर ध्यान दे रही हैं।
लोगों को सतर्क रहने की सलाह
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि गर्मी के दौरान पर्याप्त पानी पिएं, दोपहर के समय सीधे धूप में निकलने से बचें और बुजुर्गों व कमजोर स्वास्थ्य वाले लोगों का विशेष ध्यान रखें।
जर्मनी में बढ़ती गर्मी और उससे जुड़ी मौतों के आंकड़े यूरोप में बदलते मौसम के गंभीर प्रभाव को दिखाते हैं। 40 डिग्री से ऊपर पहुंचता तापमान अब केवल मौसम की समस्या नहीं रह गया है, बल्कि यह सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए बड़ी चुनौती बन चुका है। आने वाले समय में हीटवेव से निपटने के लिए मजबूत योजनाओं की जरूरत और बढ़ सकती है।
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