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त्योहारी सीजन से पहले चीनी का संकट, कम उत्पादन और ब्राजील की नई नीति ने बढ़ाई चिंता

by | Aug 23, 2026 | News Featured

Global Sugar Crisis: भारत में त्योहारों का मौसम शुरू होने से पहले चीनी की बढ़ती कीमतों ने चिंता बढ़ा दी है। हालांकि, यह समस्या केवल भारत तक सीमित नहीं है। वैश्विक बाजार में भी चीनी की आपूर्ति पर दबाव दिखाई दे रहा है। इसके पीछे घरेलू उत्पादन में कमी, मौसम में बदलाव और दुनिया के बड़े चीनी उत्पादक ब्राजील का गन्ने को इथेनॉल उत्पादन की ओर मोड़ना प्रमुख कारण माने जा रहे हैं।

भारत में अनुमान से कम चीनी उत्पादन

सरकार के अनुसार, चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे कई कारण एक साथ काम कर रहे हैं। इनमें अनुमान से कम घरेलू उत्पादन, त्योहारों से पहले बढ़ती मांग, गन्ने की फसल को नुकसान, वैश्विक स्तर पर सीमित आपूर्ति और कुछ क्षेत्रों में सट्टेबाजी व जमाखोरी शामिल हैं। मौजूदा सीजन में भारत का चीनी उत्पादन करीब 306 लाख मीट्रिक टन (LMT) रहने का अनुमान है। यह गन्ना उत्पादक राज्यों के शुरुआती अनुमान 343 LMT से काफी कम है। गन्ने की फसल पर रेड रॉट (लाल सड़न) और टॉप बोरर जैसे रोगों का असर पड़ा है। इसके अलावा समय से पहले हुई अधिक बारिश और जलभराव ने भी कई क्षेत्रों में फसल को नुकसान पहुंचाया है। हालांकि, सरकार का कहना है कि उत्पादन अनुमान से कम रहने के बावजूद देश में पर्याप्त चीनी का भंडार मौजूद है। यह भंडार अक्टूबर में नए पेराई सीजन के शुरू होने तक घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त बताया जा रहा है।

ब्राजील में भी चीनी उत्पादन पर दबाव

वैश्विक चीनी बाजार में ब्राजील की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। अमेरिकी कृषि विभाग की विदेशी कृषि सेवा के आंकड़ों के अनुसार, दुनिया के कुल गन्ना उत्पादन में ब्राजील की हिस्सेदारी करीब 24 प्रतिशत है, जबकि भारत करीब 16 प्रतिशत के साथ दूसरे प्रमुख उत्पादकों में शामिल है। लेकिन अब ब्राजील में भी चीनी उत्पादन और उपलब्धता को लेकर दबाव बढ़ रहा है। ब्राजील गन्ने का इस्तेमाल तेजी से इथेनॉल बनाने में कर रहा है। इससे चीनी के लिए उपलब्ध गन्ने की मात्रा प्रभावित हो सकती है। ब्राजील की नेशनल सप्लाई कंपनी कोनाब के अनुमान के मुताबिक, देश में चीनी उत्पादन में करीब 3 प्रतिशत की कमी आ सकती है। इस साल उत्पादन लगभग 43 मिलियन टन रहने का अनुमान जताया गया है।

इथेनॉल की तरफ क्यों बढ़ रहा ब्राजील

ब्राजील में गन्ने को चीनी के बजाय इथेनॉल उत्पादन में इस्तेमाल करने का रुझान बढ़ रहा है। इसके पीछे कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भी एक बड़ी वजह हैं। जब ईंधन की कीमतें ऊंची होती हैं, तो गन्ने से बनने वाला इथेनॉल अधिक आकर्षक विकल्प बन जाता है। ब्राजील ने जुलाई के अंत में अनिवार्य इथेनॉल मिश्रण की दर बढ़ाकर 32 प्रतिशत कर दी। इससे पहले यह दर एक महीने पहले 30 प्रतिशत और एक साल पहले 27 प्रतिशत थी। इस बदलाव का सीधा असर चीनी की उपलब्धता पर पड़ सकता है। अगर ज्यादा गन्ना इथेनॉल के लिए इस्तेमाल होगा तो चीनी उत्पादन के लिए उपलब्ध कच्चा माल कम हो सकता है और वैश्विक बाजार में आपूर्ति पर दबाव बढ़ सकता है।

अल नीनो भी बढ़ा रहा मुश्किल

चीनी की वैश्विक आपूर्ति के सामने दूसरी बड़ी चुनौती मौसम है। अल नीनो के कारण ब्राजील के मध्य और दक्षिणी हिस्सों में बारिश में देरी और तापमान बढ़ने से गन्ने की फसल प्रभावित होने की आशंका है। भारत और थाईलैंड जैसे प्रमुख गन्ना उत्पादक क्षेत्रों पर भी मौसम का असर पड़ रहा है। थाईलैंड दुनिया के कुल गन्ना उत्पादन में करीब 6 प्रतिशत योगदान देता है। वहां भी अल नीनो के कारण बारिश कम होने की आशंका जताई जा रही है। विश्लेषकों का मानना है कि मौसम संबंधी जोखिम आने वाले समय में चीनी के उत्पादन पर और दबाव डाल सकते हैं।

वैश्विक बाजार में भी बढ़ी कीमत

अमेरिकी कमोडिटी बाजार में चीनी वायदा कीमतें 17 सेंट प्रति पाउंड से ऊपर कारोबार कर रही हैं और मई 2025 के बाद के ऊंचे स्तरों के करीब बनी हुई हैं। वैश्विक आपूर्ति सीमित होने की आशंका से बाजार को समर्थन मिल रहा है। विश्लेषकों ने 2026/27 में वैश्विक चीनी की कमी के अपने अनुमान को भी बढ़ाया है। इसके बाद 2027/28 में गन्ने और चुकंदर की कम बुवाई के कारण यह कमी और बढ़ने की संभावना जताई गई है।

आगे क्या होगा

भारत में फिलहाल सरकार पर्याप्त भंडार होने का दावा कर रही है, लेकिन वैश्विक बाजार में स्थिति कई कारकों पर निर्भर करेगी। ब्राजील में इथेनॉल उत्पादन का बढ़ता रुझान, कच्चे तेल की कीमतें और भारत, थाईलैंड समेत प्रमुख उत्पादक देशों में मौसम की स्थिति चीनी की आपूर्ति को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में आने वाले महीनों में वैश्विक चीनी बाजार पर दबाव बना रह सकता है। भारत में भी त्योहारों के दौरान मांग बढ़ने से कीमतों पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा।

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