Middle East conflict energy impact: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में अनिश्चितता के बीच भारत सरकार ने प्राकृतिक गैस और एलपीजी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 को लागू करते हुए गैस की आपूर्ति को नियंत्रित करने और प्राथमिकता के आधार पर वितरण सुनिश्चित करने का निर्णय लिया है।
सरकार की ओर से जारी अधिसूचना में कहा गया है कि प्राकृतिक गैस की आपूर्ति को प्राथमिकता के आधार पर आवंटित किया जाएगा। साथ ही, परिचालन उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए पिछले छह महीनों की औसत खपत के 100 प्रतिशत तक गैस उपलब्ध कराने की कोशिश की जाएगी।
सरकार का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य ऊर्जा आपूर्ति में संभावित बाधाओं के बीच देश में गैस की निर्बाध उपलब्धता बनाए रखना है। भारत में वर्तमान समय में लगभग 33.08 करोड़ सक्रिय एलपीजी उपभोक्ता हैं, इसलिए सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि घरेलू और औद्योगिक जरूरतों को प्रभावित न होना पड़े।
भारत में एलपीजी की मांग काफी अधिक है और इसका बड़ा हिस्सा आयात पर निर्भर करता है। वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान देश में कुल 31.3 मिलियन टन एलपीजी की खपत दर्ज की गई। हालांकि, इसमें से केवल 12.8 मिलियन टन का उत्पादन देश में हुआ, जबकि बाकी मात्रा विदेशों से आयात की गई।
एलपीजी आयात का लगभग 85 से 90 प्रतिशत हिस्सा सऊदी अरब और अन्य खाड़ी देशों से आता है। इन देशों से ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण और संकरे ऊर्जा परिवहन मार्गों में से एक माना जाता है। मध्य पूर्व में जारी तनाव के कारण इस मार्ग में व्यवधान की आशंका बढ़ गई है, जिससे भारत सहित कई देशों के लिए ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता पैदा हो गई है।
रिपोर्टों के अनुसार, देश में कच्चे तेल का भंडार फिलहाल पर्याप्त है, जिससे पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति पर तत्काल कोई बड़ा असर नहीं पड़ा है। हालांकि प्राकृतिक गैस की आपूर्ति लगभग 30 प्रतिशत तक प्रभावित होने की खबर सामने आई है।
भारत प्रतिदिन लगभग 19.5 करोड़ मानक घन मीटर प्राकृतिक गैस का उपयोग करता है। यह गैस बिजली उत्पादन, उर्वरक निर्माण, वाहनों के लिए सीएनजी उत्पादन और घरेलू रसोई में पाइप्ड गैस के रूप में इस्तेमाल होती है।
इसके अलावा इस्पात, सिरेमिक और कई अन्य उद्योगों में भी प्राकृतिक गैस एक महत्वपूर्ण कच्चे माल के रूप में प्रयोग की जाती है। देश की कुल गैस जरूरतों का लगभग आधा हिस्सा आयात के जरिए पूरा किया जाता है।
ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने और आयात जोखिम को कम करने के लिए भारत ने हाल ही में अमेरिका के साथ एलपीजी आयात का एक समझौता किया है। इस समझौते के तहत सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियां वर्ष 2026 में अमेरिका के खाड़ी तट से लगभग 2.2 मिलियन टन एलपीजी का आयात करेंगी। यह मात्रा भारत के कुल वार्षिक एलपीजी आयात का लगभग 10 प्रतिशत होगी। सरकार का मानना है कि इस तरह के समझौते भविष्य में ऊर्जा आपूर्ति को अधिक सुरक्षित और स्थिर बनाने में मदद करेंगे।
आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 एक महत्वपूर्ण भारतीय कानून है, जिसका उद्देश्य देश में आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता को सुनिश्चित करना है। इस कानून के तहत सरकार को जमाखोरी, कालाबाजारी और कृत्रिम कमी को रोकने के लिए सख्त कदम उठाने का अधिकार मिलता है। यह अधिनियम सरकार को खाद्य पदार्थों, दवाओं और ईंधन जैसी जरूरी वस्तुओं के उत्पादन, आपूर्ति, वितरण और कीमतों को नियंत्रित करने की शक्ति देता है।
मौजूदा परिस्थितियों में इस कानून को लागू कर सरकार यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रही है कि देश में गैस और ऊर्जा आपूर्ति पर किसी तरह का गंभीर संकट न पैदा हो और आम उपभोक्ताओं को आवश्यक सेवाएं लगातार मिलती रहें।
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