बिहार

खराब फेफड़े और 70% कमजोर आंखें… कोटा में ‘क्लासमेट’ बनकर मां ने बेटे को बना दिया IITian

Gunjan Kumar IIT Success Story: बिहार के सीतामढ़ी जिले के रहने वाले गुंजन कुमार की सफलता की कहानी संघर्ष, हिम्मत और मां के अटूट साथ की मिसाल बन गई है। गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) में प्रवेश का अपना सपना पूरा कर दिखाया। इस सफर में उनकी मां ने केवल एक अभिभावक की भूमिका नहीं निभाई, बल्कि पढ़ाई के दौरान उनकी 'क्लासमेट' बनकर हर कदम पर उनका साथ दिया।

बीमारी ने खड़ी कर दी बड़ी चुनौती

जानकारी के अनुसार, जेईई (JEE) परीक्षा से पहले गुंजन कुमार का फेफड़ा कोलेप्स हो गया था। इस वजह से उन्हें लंबे समय तक इलाज कराना पड़ा। इसके अलावा उनकी आंखों की रोशनी भी लगभग 70 प्रतिशत तक प्रभावित बताई जाती है। इन स्वास्थ्य समस्याओं ने उनकी तैयारी को काफी मुश्किल बना दिया। ऐसे हालात में कई लोगों को लगा कि उनका IIT तक पहुंचने का सपना अधूरा रह जाएगा, लेकिन गुंजन ने हिम्मत नहीं हारी।

मां बनीं बेटे की 'क्लासमेट'

गुंजन की पढ़ाई में उनकी मां ने सबसे बड़ी भूमिका निभाई। स्वास्थ्य समस्याओं के कारण जब पढ़ाई प्रभावित होने लगी, तब उनकी मां हर क्लास, नोट्स और पढ़ाई में उनके साथ खड़ी रहीं। वह पढ़ाई के दौरान बेटे की मदद करतीं, नोट्स तैयार करातीं और कठिन विषयों को समझने में सहयोग देतीं। यही कारण है कि लोग उन्हें गुंजन की 'क्लासमेट' कहने लगे।

मुश्किलों के बीच जारी रखी तैयारी

बीमारी और इलाज के बावजूद गुंजन ने अपनी पढ़ाई नहीं छोड़ी। डॉक्टरों की सलाह का पालन करते हुए उन्होंने अपनी तैयारी जारी रखी। सीमित शारीरिक क्षमता के बावजूद उन्होंने नियमित अभ्यास और आत्मविश्वास के दम पर जेईई परीक्षा की तैयारी पूरी की। उनकी मेहनत और परिवार के सहयोग का परिणाम यह रहा कि उन्होंने IIT में प्रवेश पाने का अपना लक्ष्य हासिल कर लिया।

परिवार का साथ बना सबसे बड़ी ताकत

गुंजन की सफलता में उनके परिवार का योगदान अहम रहा। कठिन समय में परिवार ने उनका मनोबल बनाए रखा और उन्हें लगातार आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। खासकर उनकी मां ने हर परिस्थिति में उनका हौसला बढ़ाया और पढ़ाई में सक्रिय रूप से सहयोग दिया।

युवाओं के लिए प्रेरणादायक कहानी

गुंजन कुमार की कहानी उन छात्रों के लिए प्रेरणा है जो किसी बीमारी, आर्थिक परेशानी या अन्य कठिनाइयों के कारण अपने सपनों को छोड़ने का विचार करते हैं। उनका सफर यह संदेश देता है कि मजबूत इच्छाशक्ति, लगातार मेहनत और परिवार का साथ मिलने पर बड़ी से बड़ी चुनौती का सामना किया जा सकता है।

सीतामढ़ी के गुंजन कुमार ने गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के बावजूद IIT तक का सफर तय कर यह साबित कर दिया कि कठिन परिस्थितियां सफलता की राह रोक नहीं सकतीं। मां के समर्पण और अपने अटूट संकल्प के बल पर उन्होंने वह उपलब्धि हासिल की, जो आज लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है। उनकी कहानी बताती है कि यदि हौसले मजबूत हों और परिवार का साथ मिले, तो मुश्किल से मुश्किल मंजिल भी हासिल की जा सकती है।

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Lavanya Dayal

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