Gyanodya Conclave-2025
Gyanodya Conclave-2025 : न्यूज इंडिया द्वारा आयोजित किया गया ज्ञानोदय कॉन्क्लेव-2025 में शिक्षा और बच्चों के संस्कारों पर हुई चर्चा ने माहौल को गंभीर और आत्ममंथन करने वाला बना दिया। पेरेंट एसोसिएशन की अध्यक्ष सीमा त्यागी ने मंच से बोलते हुए कहा कि शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बच्चों के जीवन को आकार देने का सबसे बड़ा माध्यम है। उन्होंने कहा कि शिक्षा प्रणाली पर बार-बार सवाल उठाए जाते हैं, लेकिन असल जिम्मेदारी परिवार और समाज की भी है।
सीमा त्यागी ने कहा कि “पहली शिक्षिका मां होती है,” लेकिन आज के दौर में मां-बाप दोनों के पास बच्चों के लिए समय की भारी कमी है। बदलती सामाजिक व्यवस्था में जहां जॉइंट फैमिली का चलन लगभग खत्म हो गया है, वहीं बच्चे दादा-दादी और नाना-नानी के संस्कारों से भी वंचित रह रहे हैं। पहले गर्मियों की छुट्टियों में जहां बच्चे रिश्तेदारों के घर जाकर पारिवारिक मूल्यों को सीखते थे, वहीं आजकल समर कैंप और ट्यूशन क्लास उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन गए हैं।
उन्होंने चिंता जताई कि बच्चों का ज्यादातर समय स्कूल, ट्यूशन और मोबाइल गेम्स में बीतता है। इस कारण न तो उनके पास खेलने का समय है, न घूमने का और न ही परिवार के साथ जीवन के मूल्यों को आत्मसात करने का अवसर। उन्होंने सवाल उठाया कि जब हम बच्चों को इंसान बनाने की सारी जिम्मेदारी स्कूलों पर डाल देते हैं, तो परिवार की भूमिका कहां चली जाती है?
अपने संबोधन में सीमा त्यागी ने संस्कार और शिक्षा के महत्व को एक श्लोक के जरिए समझाया—
“येषां न विद्या न तपो न दानं, ज्ञानं न शीलं न गुणो न धर्मः।
ते मृत्युलोके भुवि भारभूता, मनुष्यरूपेण मृगाश्चरन्ति।।”
उन्होंने कहा कि यदि बच्चों को विद्या, ज्ञान, शील और धर्म का बोध नहीं कराया जाएगा, तो वे केवल दिखने में मनुष्य होंगे लेकिन भीतर से पशुवृत्ति को जीएंगे। शिक्षा का असली उद्देश्य अच्छे इंसान बनाना है, न कि केवल डिग्री और नौकरी पाना। कॉन्क्लेव में उपस्थित शिक्षा विशेषज्ञों ने भी स्वीकार किया कि भारत की मौजूदा शिक्षा प्रणाली ज्ञान के साथ-साथ संस्कारों की भी मांग करती है। उनका का कहना था कि नई शिक्षा नीति (NEP-2020) इस दिशा में एक बड़ा कदम है, जिसमें कौशल आधारित शिक्षा, मातृभाषा का महत्व और मूल्यों की शिक्षा को जोड़ा गया है।
सीमा त्यागी ने अंत में अपील की कि माता-पिता को बच्चों को केवल अकादमिक उपलब्धियों की दौड़ में धकेलने की बजाय उनके साथ समय बिताना चाहिए। उन्होंने कहा कि “स्कूल शिक्षा का आधार बना सकता है, लेकिन जीवन की असली शिक्षा घर और परिवार से ही मिलती है।” ज्ञानोदय कॉन्क्लेव-2025 में हुई यह चर्चा इस बात का संकेत है कि भारत में शिक्षा पर विमर्श अब केवल परीक्षा परिणामों तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों को संस्कारी और जिम्मेदार नागरिक बनाने की दिशा में भी आगे बढ़ रहा है।
Ludhiana: लुधियाना की बहादुरके रोड पर गुरुवार, 24 सितंबर को तेज रफ्तार Tata Tiago EV…
Nepal Heavy Rain: नेपाल में भारी बारिश को लेकर चेतावनी जारी की गई है। नेपाल…
Rajat Patidar: रजत पाटीदार जल्द ही एक बार फिर मैदान पर नजर आएंगे। उन्हें ऑस्ट्रेलिया-ए…
Delhi HC CJP Deepfake Case: दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ…
Gulveer Singh Silver: भारतीय धावक गुलवीर सिंह ने नागोया एशियन गेम्स में पुरुषों की 10,000…
KBC 18 Ujjwal Nikam: कौन बनेगा करोड़पति’ सीजन 18 के इस वीकेंड एपिसोड में फिल्म…