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Haryana Bank Fraud: हरियाणा के सरकारी बैंक खातों में हेराफेरी, चार कर्मचारी सस्पेंड

Haryana Bank Fraud: बैंकिंग व्यवस्था में भरोसे को झटका देने वाला एक बड़ा मामला सामने आया है। IDFC FIRST Bank की चंडीगढ़ शाखा में हरियाणा सरकार से जुड़े कुछ खातों में करीब 590 करोड़ रुपये की कथित वित्तीय अनियमितता पाई गई है। बैंक ने स्टॉक एक्सचेंज को दी सूचना में बताया कि शुरुआती जांच के बाद चार कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया है और दोष सिद्ध होने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

सीमित खातों तक मामला

बैंक की प्रारंभिक आंतरिक समीक्षा के मुताबिक, गड़बड़ी हरियाणा सरकार से संबंधित कुछ चुनिंदा खातों तक सीमित है, जो चंडीगढ़ शाखा के जरिए संचालित हो रहे थे। बैंक ने स्पष्ट किया है कि अन्य ग्राहकों के खातों पर इसका कोई असर नहीं पड़ा है। रिकन्सिलिएशन के दौरान जिन खातों की जांच हुई, उनमें लगभग 590 करोड़ रुपये का अंतर सामने आया।

ऐसे खुला मामला

यह मामला तब सामने आया जब हरियाणा सरकार के एक विभाग ने अपना खाता बंद कर शेष राशि दूसरे बैंक में स्थानांतरित करने का अनुरोध किया। दस्तावेजों के मिलान के दौरान सरकारी रिकॉर्ड और बैंक बैलेंस में बड़ा अंतर पाया गया।

18 फरवरी से जांच तेज की गई। इसके बाद सरकार की अन्य इकाइयों ने भी खातों का ब्यौरा मांगा, जहां इसी तरह की विसंगतियां सामने आईं। 21 फरवरी को बैंक ने स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग में बताया कि शुरुआती आकलन में गड़बड़ी की रकम लगभग 590 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है।

बैंक की कार्रवाई

बैंक ने आंतरिक जांच शुरू कर दी है और कहा है कि कानूनी व अनुशासनात्मक कदम उठाए जाएंगे। संदिग्ध खातों और संभावित लाभार्थियों पर नजर रखी जा रही है। जरूरत पड़ने पर अन्य बैंकों में मौजूद संबंधित खातों पर लियन लगाने और वसूली की प्रक्रिया भी अपनाई जाएगी। बैंक को आशंका है कि कुछ कर्मचारियों ने बाहरी व्यक्तियों या संस्थाओं के साथ मिलकर यह योजना बनाई हो सकती है।

हरियाणा सरकार का कदम

इस घटनाक्रम के बाद हरियाणा सरकार के वित्त विभाग (संस्थागत वित्त एवं क्रेडिट नियंत्रण) ने AU Small Finance Bank और IDFC FIRST Bank को तत्काल प्रभाव से सरकारी कार्यों के लिए डी-एम्पैनल कर दिया है। सभी विभागों, बोर्डों, निगमों और सार्वजनिक उपक्रमों को निर्देश दिया गया है कि वे इन बैंकों में जमा सरकारी धनराशि अन्य अधिकृत बैंकों में स्थानांतरित करें और संबंधित खाते बंद करें। अगली सूचना तक इन बैंकों के माध्यम से कोई सरकारी लेनदेन नहीं होगा।

विपक्ष ने उठाए सवाल

मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस नेता राव नरेंद्र सिंह ने इसे जन विश्वास पर आघात बताया। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी राशि बिना उच्च स्तर की लापरवाही या मिलीभगत के संभव नहीं लगती। उन्होंने निष्पक्ष और समयबद्ध जांच की मांग करते हुए दोषियों की पहचान सार्वजनिक करने और कड़ी कार्रवाई करने की अपील की।

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Deepika Gupta

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