Donald Trump Supreme Court reaction: डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले पर कड़ा एतराज जताया, जिसमें उनके प्रशासन द्वारा लगाए गए टैरिफ पर सवाल उठाए गए थे। अदालत के बहुमत ने माना था कि राष्ट्रपति ने अपने अधिकार क्षेत्र से आगे बढ़कर कदम उठाया। ट्रंप ने इस निर्णय को “हास्यास्पद” और “मूर्खतापूर्ण” करार देते हुए दावा किया कि इससे उनकी शक्तियां सीमित होने के बजाय और मजबूत हुई हैं।
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लिखा कि वे विदेशी देशों के खिलाफ कड़े कदम उठा सकते हैं, खासकर उन देशों के खिलाफ जिन्हें उन्होंने वर्षों से अमेरिका का शोषणकर्ता बताया। उन्होंने यहां तक कहा कि वे सुप्रीम कोर्ट का नाम छोटे अक्षरों में लिखेंगे, जिसे उन्होंने अनादर का प्रतीक बताया। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि अदालत का फैसला उनकी शक्तियों को कैसे बढ़ाता है।
ट्रंप की पोस्ट में व्यापार लाइसेंस और टैरिफ के बीच अंतर को लेकर भ्रम भी नजर आया। 1971 के अंतर्राष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियां अधिनियम (IEEPA) के तहत राष्ट्रपति आर्थिक आपातकाल में कुछ विशेष अधिकारों का इस्तेमाल कर सकते हैं। अदालत ने माना कि राष्ट्रपति विदेशी निर्यातकों से लाइसेंस मांग सकते हैं, लेकिन सीधे तौर पर शुल्क या टैरिफ लगाने की सीमा तय की है। ट्रंप ने सवाल उठाया कि यदि लाइसेंस जारी किए जाते हैं तो उन पर शुल्क क्यों नहीं लिया जा सकता। उनका तर्क था कि अन्य सभी लाइसेंस पर शुल्क लगता है, तो अमेरिका को इससे अलग क्यों रखा जाए।
राष्ट्रपति ने सुप्रीम कोर्ट को “अक्षम” बताते हुए आलोचना की, हालांकि तीन रूढ़िवादी झुकाव वाले न्यायाधीश ब्रेट कवानौघ, क्लेरेंस थॉमस और सैमुअल अलिटो की प्रशंसा की, जिन्होंने फैसले से असहमति जताई थी।
ट्रंप ने अपने बयान में जन्मजात नागरिकता के मुद्दे को भी जोड़ा। उन्होंने 14वें संशोधन की व्याख्या को लेकर असहमति जताई और कहा कि इसका उद्देश्य गृहयुद्ध के बाद मुक्त गुलामों के बच्चों को नागरिकता देना था, न कि अवैध प्रवासियों के बच्चों को।
अमेरिकी संविधान का 14वां संशोधन कहता है कि अमेरिका में जन्मे या प्राकृतिक रूप से नागरिकता प्राप्त करने वाले सभी व्यक्ति नागरिक हैं। ट्रंप पहले भी कार्यकारी आदेश के जरिए इस प्रावधान की व्याख्या बदलने की कोशिश कर चुके हैं।
अदालत द्वारा टैरिफ को 10 प्रतिशत तक सीमित किए जाने के बाद ट्रंप ने इसे बढ़ाकर 15 प्रतिशत करने की घोषणा की। उनका कहना है कि यह कदम पूरी तरह कानूनी है और अमेरिका के हितों की रक्षा के लिए जरूरी है।
उन्होंने संकेत दिया कि आने वाले महीनों में प्रशासन नए और कानूनी रूप से मान्य टैरिफ ढांचा पेश करेगा, जिसे वे “अमेरिका को फिर से महान बनाने” की दिशा में अहम कदम मानते हैं।
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