Jammu Kashmir Statehood: जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा वापस मिलने की मांग लंबे समय से उठती रही है। इसी बीच नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष और वरिष्ठ नेता फारूक अब्दुल्ला ने एक बयान देकर राजनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने वादे के अनुरूप जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल करने की दिशा में कदम उठा सकते हैं। उनके इस बयान के बाद क्षेत्र की राजनीति में एक बार फिर राज्य के दर्जे का मुद्दा केंद्र में आ गया है। विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों की ओर से भी इस विषय पर प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
क्या है पूरा मामला
साल 2019 में केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त करते हुए राज्य का पुनर्गठन किया था। इसके बाद जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेशों के रूप में स्थापित किया गया। तब से ही जम्मू-कश्मीर में राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग लगातार उठती रही है। केंद्र सरकार की ओर से कई मौकों पर यह कहा गया है कि उचित समय आने पर जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा वापस देने पर विचार किया जाएगा। इसी पृष्ठभूमि में फारूक अब्दुल्ला का ताजा बयान महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
फारूक अब्दुल्ला ने अपने बयान में विश्वास जताया कि केंद्र सरकार जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल करने के अपने आश्वासन को पूरा करेगी। उन्होंने कहा कि जनता लंबे समय से इस फैसले का इंतजार कर रही है और राज्य के लोकतांत्रिक ढांचे को और मजबूत करने के लिए यह कदम अहम साबित हो सकता है। हालांकि उन्होंने किसी निश्चित समय-सीमा का उल्लेख नहीं किया, लेकिन उनके बयान ने राजनीतिक चर्चाओं को नई दिशा दे दी है।
राज्य का दर्जा क्यों है महत्वपूर्ण
राज्य का दर्जा मिलने पर किसी क्षेत्र को प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर अधिक अधिकार प्राप्त होते हैं। विधानसभा और निर्वाचित सरकार की भूमिका भी अधिक प्रभावी हो जाती है। जम्मू-कश्मीर के कई राजनीतिक दलों का मानना है कि पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल होने से स्थानीय प्रशासन और विकास कार्यों को गति मिलेगी। विशेषज्ञों का कहना है कि राज्य का दर्जा बहाल होने से जनता और सरकार के बीच समन्वय बेहतर हो सकता है तथा लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूती मिल सकती है।
राजनीतिक दलों की नजर केंद्र के अगले कदम पर
जम्मू-कश्मीर की राजनीति में राज्य का दर्जा एक प्रमुख मुद्दा बना हुआ है। नेशनल कॉन्फ्रेंस समेत कई क्षेत्रीय दल लगातार इसकी मांग करते रहे हैं। दूसरी ओर, केंद्र सरकार का कहना रहा है कि क्षेत्र में विकास, सुरक्षा और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत करने के बाद इस विषय पर आगे निर्णय लिया जाएगा। अब सभी दलों और आम लोगों की नजर केंद्र सरकार के अगले कदम पर टिकी हुई है। यदि राज्य का दर्जा बहाल करने की दिशा में कोई ठोस पहल होती है, तो यह जम्मू-कश्मीर की राजनीति में एक बड़ा बदलाव माना जाएगा।
फारूक अब्दुल्ला के बयान ने एक बार फिर राज्य के दर्जे के मुद्दे को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। हालांकि अंतिम फैसला केंद्र सरकार के स्तर पर ही होगा, लेकिन इस विषय पर बढ़ती राजनीतिक सक्रियता संकेत देती है कि आने वाले समय में जम्मू-कश्मीर की संवैधानिक और राजनीतिक स्थिति को लेकर महत्वपूर्ण घटनाक्रम देखने को मिल सकते हैं।
फिलहाल राज्य के दर्जे को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन इस मुद्दे पर उम्मीदों और अटकलों का दौर लगातार जारी है।

