क्रिकेट

जीत के जश्न में छिपी बड़ी चिंता! नागपुर में NZ को हराने के बाद भी टीम इंडिया पर क्यों मंडराया खतरा?

IND VS NZ: नागपुर में खेले गए पहले टी20 मुकाबले में भारत ने न्यूजीलैंड को 48 रनों से करारी शिकस्त देकर सीरीज की शानदार शुरुआत की। पहले बल्लेबाजी करते हुए टीम इंडिया ने 238 रनों का पहाड़ जैसा स्कोर खड़ा किया, जिसके जवाब में कीवी टीम 190 रन ही बना सकी। जीत भले ही बड़ी रही, लेकिन इस जीत के बीच टीम इंडिया की दो ऐसी कमजोरियां सामने आईं, जो टी20 वर्ल्ड कप से पहले चिंता बढ़ा रही हैं। अगर यही गलतियां दोहराई जाती रहीं, तो अगले महीने शुरू होने वाले टी20 वर्ल्ड कप में भारत का खिताबी सपना मुश्किल में पड़ सकता है।

बल्लेबाजी-गेंदबाजी शानदार, लेकिन फील्डिंग में फेल!

नागपुर मैच में भारतीय बल्लेबाजों ने आक्रामक खेल दिखाया और गेंदबाजों ने भी रन गति पर लगाम लगाई, लेकिन फील्डिंग ने पूरे प्रदर्शन पर पानी फेर दिया। मुकाबले के दौरान इशान किशन और रिंकू सिंह ने आसान कैच छोड़ दिए, जिसने टीम मैनेजमेंट की चिंता बढ़ा दी। यह कोई एक मैच की कहानी नहीं है, बल्कि पिछले कई मुकाबलों से टीम इंडिया की कैचिंग लगातार कमजोर होती जा रही है। चाहे टेस्ट हो, वनडे या टी20 तीनों फॉर्मेट में भारत की फील्डिंग सवालों के घेरे में है।

कैच टपकाने की आदत बनी बड़ी बीमारी

आंकड़े बताते हैं कि भारतीय टीम की कैच एफिशिएंसी लगातार गिर रही है। साल 2023 से अब तक टेस्ट खेलने वाली 12 टीमों में भारत कैच एफिशिएंसी के मामले में 10वें स्थान पर है। भारत की कैच एफिशिएंसी सिर्फ 78.1 प्रतिशत है, जो टॉप टीमों से काफी कम है। इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज में भारत ने शुरुआती तीन टेस्ट में ही 8 आसान कैच छोड़े थे। पूरी सीरीज में टीम इंडिया ने कुल 23 मौके गंवाए, जो मैच का रुख बदल सकते थे।

वनडे और टी20 में भी हाल बेहाल

वनडे फॉर्मेट में भी भारत की कैच एफिशिएंसी सिर्फ 75.6 प्रतिशत है और यहां भी टीम 10वें स्थान पर बनी हुई है। एशिया कप 2025 में भारत ने 25 में से 12 कैच छोड़े थे, जिससे वह आठ टीमों में सिर्फ हॉन्गकॉन्ग से बेहतर रहा। यह सवाल अब लगातार उठ रहा है कि जब भारतीय खिलाड़ी फिटनेस के मामले में दुनिया की बेहतरीन टीमों में गिने जाते हैं, तो फिर फील्डिंग में इतनी चूक क्यों हो रही है?

वर्ल्ड कप से पहले चेतावनी की घंटी

टी20 जैसे छोटे फॉर्मेट में एक कैच मैच का रुख पलट देता है। वर्ल्ड कप जैसे बड़े टूर्नामेंट में बार-बार कैच छोड़ना भारी पड़ सकता है। अगर टीम इंडिया को फिर से विश्व चैंपियन बनना है, तो इस कमजोरी पर तुरंत काम करना होगा। नागपुर की जीत ने आत्मविश्वास जरूर बढ़ाया है, लेकिन यह जीत एक साफ संदेश भी दे गई बल्ला और गेंद साथ दे रहे हैं, अब फील्डिंग सुधरी तो ही वर्ल्ड कप सपना पूरा होगा।

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Shagun Chaurasia

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