मध्य प्रदेश की IAS अधिकारी नेहा मारव्या इन दिनों चर्चा में हैं। इसकी वजह उनका लगातार हो रहा तबादला है। 2011 बैच की अधिकारी नेहा ने 14 साल तक कलेक्टर बनने का इंतजार किया।
जनवरी 2025 में उन्हें पहली बार डिंडौरी का कलेक्टर बनाया गया। हालांकि, करीब आठ महीने बाद उन्हें इस पद से हटा दिया गया।
इसके बाद उन्हें अलग-अलग जिम्मेदारियां मिलीं। अब 5 सितंबर 2026 की ट्रांसफर सूची के बाद वह एक बार फिर चर्चा में आ गई हैं। इस बार जॉइनिंग के करीब 50 दिन बाद ही उनकी जिम्मेदारी बदल दी गई।
14 साल बाद मिली थी पहली कलेक्टरी
नेहा मारव्या 2011 बैच की IAS अधिकारी हैं। उन्होंने इलाहाबाद के MNNIT से कंप्यूटर साइंस में बीटेक किया है। इसके बाद उन्होंने UPSC परीक्षा पास की और मध्य प्रदेश कैडर मिला।
करियर के शुरुआती वर्षों में उन्हें कई जिम्मेदारियां मिलीं। हालांकि, लंबे समय तक उन्हें कलेक्टर बनने का मौका नहीं मिला।
जनवरी 2025 में आखिरकार उन्हें डिंडौरी का कलेक्टर बनाया गया। यह उनकी पहली बड़ी फील्ड पोस्टिंग थी।
डिंडौरी में राजनीतिक विरोध के बाद हटीं
डिंडौरी में नेहा मारव्या की कार्यशैली को लेकर राजनीतिक विरोध की खबरें सामने आईं। बीजेपी विधायक और पूर्व मंत्री ओम प्रकाश धुर्वे समेत कुछ नेताओं ने उनके खिलाफ सवाल उठाए।
इस दौरान उनके प्रशासनिक फैसलों को लेकर भी चर्चा हुई। इसके बाद करीब आठ महीने में उनका डिंडौरी से तबादला कर दिया गया।
भोपाल में मिलीं कई अहम जिम्मेदारियां
डिंडौरी से हटने के बाद नेहा मारव्या को भोपाल में नई जिम्मेदारियां दी गईं। उन्हें आदिम जाति क्षेत्रीय विकास योजनाओं का संचालक बनाया गया।
इसके अलावा उन्हें MAPCET और अनुसूचित जनजाति वित्त एवं विकास निगम से जुड़ी जिम्मेदारियां भी मिलीं।
इसी दौरान विभागीय कर्मचारियों के साथ उनके मतभेद की खबरें सामने आईं। बाद में IAS एसोसिएशन के व्हाट्सऐप ग्रुप में उनके एक संदेश ने मामला और चर्चा में ला दिया।
व्हाट्सऐप संदेश में उठाए सवाल
वायरल संदेश में नेहा मारव्या ने विभागीय कामकाज को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कुछ कर्मचारियों पर उनके खिलाफ माहौल बनाने का आरोप लगाया।
उन्होंने फाइलें रोके जाने और अनुशासनहीनता जैसी शिकायतों का भी जिक्र किया। उनका दावा था कि इन मामलों में कार्रवाई की जगह उनका तबादला कर दिया गया।
नेहा ने IAS एसोसिएशन की भूमिका पर भी सवाल उठाया। इसी संदेश के सामने आने के बाद उनका मामला और ज्यादा चर्चा में आ गया।
एक जांच रिपोर्ट से भी जुड़ा नाम
नेहा मारव्या का नाम एक चर्चित जांच रिपोर्ट को लेकर भी सामने आया था। उन्होंने पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग से जुड़े एक मामले की जांच की थी।
इस जांच में कथित अनियमितताओं और पद के दुरुपयोग से जुड़े बिंदुओं का जिक्र किया गया था। बाद में EOW की कार्रवाई में भी इस रिपोर्ट का उल्लेख सामने आया।
50 दिन में फिर बदली जिम्मेदारी
5 सितंबर 2026 को जारी ट्रांसफर सूची में नेहा मारव्या का नाम फिर आया। उनसे कई अतिरिक्त प्रभार वापस ले लिए गए।
अब उन्हें मध्य प्रदेश अनुसूचित जनजाति वित्त एवं विकास निगम के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी दी गई है।
इस तबादले के बाद उनका पुराना व्हाट्सऐप संदेश भी चर्चा में आ गया। संदेश में उन्होंने लिखा था कि जॉइन किए अभी 50 दिन ही हुए हैं और फिर तबादला हो गया।
क्यों चर्चा में है पूरा मामला?
नेहा मारव्या का मामला सिर्फ एक अधिकारी के तबादले तक सीमित नहीं है। उनके करियर में लंबे समय तक कलेक्टर की पोस्टिंग का इंतजार रहा।
इसके बाद पहली कलेक्टरी मिली तो आठ महीने में तबादला हो गया। फिर नई जिम्मेदारियों के दौरान भी विवाद सामने आए।
अब एक साल के भीतर चार बार तबादले की चर्चा है। इसी वजह से उनके मामले ने प्रशासनिक स्थिरता और बार-बार होने वाले तबादलों पर बहस छेड़ दी है।
फिलहाल नेहा मारव्या को नई जिम्मेदारी मिल चुकी है। वहीं उनके वायरल व्हाट्सऐप संदेश को लेकर भी चर्चा जारी है।

