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Strait Of Hormuz से गुजरने वाले जहाजों पर भारतीय नाविकों की तैनाती पर रोक, DGMA ने जारी किए नए निर्देश

India Strait of Hormuz seafarers: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव को देखते हुए भारत के महानिदेशालय समुद्री प्रशासन (DGMA) ने जहाज मालिकों, जहाज प्रबंधकों और भर्ती एजेंसियों को अगले आदेश तक होरमुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर भारतीय नाविकों की तैनाती नहीं करने का निर्देश दिया है। 15 जुलाई 2026 को जारी आदेश में कहा गया कि हाल के हमलों के कारण इस क्षेत्र में कार्यरत नाविकों की सुरक्षा जोखिम काफी बढ़ गया है।

भारत दुनिया में नाविक उपलब्ध कराने वाला तीसरा सबसे बड़ा देश है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, दुनिया भर में 3 लाख से अधिक भारतीय नाविक विभिन्न जहाजों पर कार्यरत हैं।

सुरक्षा के लिए जारी किए गए निर्देश

DGMA ने कहा कि फारस की खाड़ी, होरमुज जलडमरूमध्य और आसपास के समुद्री क्षेत्रों में सुरक्षा स्थिति को देखते हुए भारतीय नाविकों के हितों की रक्षा के लिए अतिरिक्त सावधानी बरतना आवश्यक है। जहाजों के कप्तानों को सुरक्षा हालात पर लगातार नजर रखने और सभी नौवहन संबंधी चेतावनियों का पालन करने का निर्देश दिया गया है। नियामक ने यह भी कहा कि वह क्षेत्र की बदलती सुरक्षा स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और भारतीय नाविकों की सुरक्षा एवं कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है।

हालिया हमलों में दो भारतीय नाविकों की मौत

पिछले तीन दिनों में इस क्षेत्र में हुए अलग-अलग हमलों में दो भारतीय नाविकों की मौत हुई है। बिहार के गोपालगंज निवासी 31 वर्षीय रोहन कुमार मंगलवार को होरमुज जलडमरूमध्य में अमीराती तेल टैंकर MT Mombasa और MT Al Bahiyah पर हुए मिसाइल हमले में मारे गए। गोपालगंज के जिलाधिकारी समीर सौरभ ने उनकी मौत की पुष्टि करते हुए बताया कि पार्थिव शरीर को भारत लाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

वहीं, पुणे के 30 वर्षीय हेरंब करमरकर ओमान तट के पास मालवाहक जहाज MV GFS Galaxy पर 12 जुलाई को हुए हमले के बाद लापता हो गए थे। बाद में दुबई स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास ने उनकी मौत की पुष्टि करते हुए शोक व्यक्त किया।

मंगलवार को भारत के विदेश मंत्रालय ने ईरान के उप मिशन प्रमुख मोहम्मद जवाद होसेनी को तलब कर इस घटना पर कड़ा विरोध दर्ज कराया। संयुक्त सचिव आनंद प्रकाश ने भारत की ओर से आधिकारिक आपत्ति जताई।

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