India EV Import Bill: ईरान-अमेरिका तनाव के दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधा आने से भारत को कच्चे तेल के आयात में दिक्कतों का सामना करना पड़ा। कई देशों से अधिक कीमत पर तेल खरीदने के कारण आयात बिल बढ़ गया। अब सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को बढ़ावा देकर तेल आयात पर विदेशी निर्भरता कम करने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। नियमों में ढील देने के साथ ईवी अपनाने को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।
SBI की रिपोर्ट के मुताबिक, मौजूदा रफ्तार जारी रही तो 2027 से 2030 के बीच करीब 35 लाख इलेक्ट्रिक वाहन पेट्रोल वाहनों की जगह ले सकते हैं। यदि 2030 तक घरेलू ऑटो बाजार में ईवी की हिस्सेदारी 20% तक पहुंच जाती है, तो भारत का कच्चे तेल का आयात बिल करीब 1 लाख करोड़ रुपये कम हो सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार, मार्च से जून के बीच हर महीने औसतन 2.30 लाख ईवी पंजीकृत हुए, जबकि 2025 में यह औसत 1.30 लाख प्रति माह था। यानी मासिक ईवी रजिस्ट्रेशन में करीब 1 लाख की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
रिपोर्ट में कहा गया है कि राज्यों के बीच चार्जिंग स्टेशनों की उपलब्धता में बड़ा अंतर है। कुछ राज्यों में एक चार्जिंग स्टेशन 200 से अधिक ईवी को सेवा देता है, जबकि कहीं यह संख्या 50 तक सीमित है। देश में फिलहाल 29,151 चार्जिंग स्टेशन हैं, जिनमें से करीब 35% इंफ्रास्ट्रक्चर कर्नाटक और महाराष्ट्र में है। इसलिए सभी राज्यों में चार्जिंग नेटवर्क का विस्तार जरूरी होगा।
रिपोर्ट के अनुसार, यदि केंद्र और राज्य सरकारें ईवी को प्रभावी ढंग से बढ़ावा देती हैं, तो कच्चे तेल के आयात में बड़ी कमी आ सकती है। इससे पेट्रोल-डीजल पंपों पर निर्भरता घटेगी और भारत की मध्य पूर्व तथा अमेरिका जैसे देशों से तेल आयात पर निर्भरता भी कम होगी।
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