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मानसून की रफ्तार धीमी: देश के बड़े हिस्से में 45% बारिश की कमी

by | Jun 26, 2026 | Cover Story Top

India Monsoon 2026: देश के अधिकांश हिस्सों में दक्षिण-पश्चिम मानसून आधिकारिक रूप से पहुंच चुका है, लेकिन इसके बावजूद भारत के बड़े हिस्से में सामान्य से कम बादल और बारिश देखने को मिल रही है। गुरुवार सुबह के INSAT-3DR इंफ्रारेड सैटेलाइट चित्रों में मध्य, पश्चिम और उत्तर-पश्चिम भारत के बड़े क्षेत्रों में वर्षा कराने वाले घने बादलों की कमी साफ दिखाई दी।

26 जून तक 45% बारिश की कमी

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, 4 जून से 26 जून के बीच देश में सामान्य से 45% कम वर्षा दर्ज की गई है। यह स्थिति जून के अंतिम सप्ताह के लिहाज से असामान्य मानी जा रही है।

सैटेलाइट तस्वीरों में घने बादल मुख्य रूप से पूर्वोत्तर राज्यों, उत्तरी बंगाल की खाड़ी और दक्षिणी प्रायद्वीप के कुछ हिस्सों तक सीमित दिखाई दिए। वहीं महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और दिल्ली-एनसीआर के बड़े हिस्सों में सक्रिय मानसूनी बादलों का अभाव रहा।

कई राज्यों में बारिश का बड़ा घाटा

IMD के राज्यवार वर्षा आंकड़ों के अनुसार, मध्य और उत्तर भारत के अधिकांश राज्यों में बारिश सामान्य से काफी कम रही है। मध्य प्रदेश में सामान्य वर्षा का लगभग आधा ही पानी बरसा है। उत्तर प्रदेश, बिहार, ओडिशा, कर्नाटक, तमिलनाडु और केरल में भी उल्लेखनीय वर्षा कमी दर्ज की गई है।

सबसे अधिक प्रभावित राज्यों में गुजरात शामिल है, जहां इस अवधि में सामान्य से करीब 84% कम बारिश हुई है।

क्यों धीमा पड़ा मानसून?

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में मजबूत मानसूनी सिस्टम या निम्न दबाव क्षेत्र (Low Pressure Area) नहीं बनने से नमी का प्रवाह कमजोर रहा। इसके कारण देश के अंदरूनी हिस्सों में व्यापक वर्षा नहीं हो सकी।

हालांकि अब राहत की उम्मीद बढ़ गई है। मौसम मॉडल बताते हैं कि भूमध्य रेखा के उत्तर में पूर्वी हिंद महासागर के ऊपर एक बड़ा उष्णकटिबंधीय मौसम तंत्र विकसित हो रहा है, जो अगले 4 से 7 दिनों में बंगाल की खाड़ी की ओर बढ़ सकता है।

इसके मजबूत होने पर मानसूनी परिसंचरण में भरपूर नमी पहुंचेगी और बंगाल की खाड़ी में नया निम्न दबाव क्षेत्र बनने की संभावना बढ़ेगी। साथ ही पश्चिमी भारत के ऊपर मिडिल ट्रोपोस्फेरिक वॉर्टेक्स (MTV) बनने के संकेत भी मिले हैं, जो महाराष्ट्र, गुजरात और आसपास के इलाकों में अच्छी बारिश का कारण बन सकता है।

यदि ये दोनों मौसम प्रणालियां अनुमान के अनुसार विकसित होती हैं, तो जुलाई के पहले सप्ताह में रुका हुआ मानसून दोबारा सक्रिय हो सकता है और उत्तर-पश्चिम भारत के शेष हिस्सों में तेजी से आगे बढ़ सकता है। हालांकि मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि इसकी सटीक समय-सीमा और तीव्रता आने वाले दिनों में इस उष्णकटिबंधीय तंत्र के विकास पर निर्भर करेगी।

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