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ईरान ने इज़रायल पर लगाया प्रदर्शनकारियों को हथियार देने का आरोप, कहा- अमेरिका को इज़रायल जाना चाहिए

Iran Protest Update : ईरान में हिंसक विरोध प्रदर्शन में हजारों प्रदर्शनकारियों के मारे जाने और घायल होने की खबर के बीच कट्टरपंथी सरकार ने इज़रायल पर प्रदर्शनकारियों को हथियार मुहैया कराने का आरोप लगाया है। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराग़ची ने कहा कि इज़राइल ने उनके देश में 'प्रदर्शनकारियों को हथियार दिए' हैं और 'यही सैकड़ों मौतों की वजह बना है'। गौरतलब है, बीते साल 28 दिसंबर से शुरू हुए इस प्रदर्शन में अब तक 12 हजार से अधिक लोगों के मारे जाने के दावे किए जा रहे हैं।

अराग़ची ने अपने आरोपों में क्या कहा

विदेश मंत्री अराग़ची ने अपने अरोपों में इज़रायली पत्रकार का हवाला दिया। इसके साथ ही उन्होंने सोशल मीडिया X पर इज़रायली पत्रकार के बयान का स्क्रीनशॉट भी शेयर किया। इसमें लिखा है, "ईरान में विदेशी तत्व प्रदर्शनकारियों को हथियार दे रहे हैं और जो सैकड़ों मौतों की वजह बना है। हम किसकी बात कर रहे हैं, इसका अनुमान लगाने के लिए कोई भी स्वतंत्र है। " उन्होंने कहा, "राष्ट्रपति ट्रंप को अब यह समझ जाना चाहिए कि हत्याएं रोकने के लिए उन्हें कहां जाना है।"

मौतों की संख्या पर अमेरिकी संस्था का ये दावा

अमेरिकी संस्था ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी ने बताया कि अब तक 2,550 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं। इनमें 2,403 प्रदर्शनकारी और 147 सरकार से जुड़े लोग शामिल हैं। वहीं दूसरी ओर वेबसाइट ईरान इंटरनेशनल ने दावा किया है कि देशभर में कम से कम 12 हजार लोगों की मौत हुई है। ज्यादातर लोग गोली लगने से मारे गए हैं।

इरफान सुल्तानी की फांसी टली

 मानवाधिकार संगठनों ने दावा किया है कि 26 वर्षीय ईरानी प्रदर्शनकारी इरफान सुल्तानी की फांसी फिलहाल टाल दी गई है। हेंगॉ राइट्स ग्रुप के हवाले से बताया कि सुल्तानी की फांसी बुधवार को तय थी, लेकिन उनके परिजनों से मिली जानकारी के बाद इसे स्थगित कर दिया गया। हालांकि, अधिकार संगठन ने चेतावनी दी है कि सुल्तानी की जान को लेकर खतरा पूरी तरह टला नहीं है और उनके जीवन को लेकर गंभीर और लगातार चिंता बनी हुई है।

सुल्तानी पर ईरान सरकार ने लगाए थे ये आरोप

सुल्तानी पर मोहरेबेह (भगवान के खिलाफ युद्ध छेड़ना) का आरोप लगाया गया है। यह ईरानी कानून में सबसे गंभीर अपराधों में से एक है, जिसकी सजा मौत (फांसी) होती है। यह आरोप आमतौर पर उन लोगों पर लगाया जाता है, जो सरकार के खिलाफ विद्रोह या जंग भड़काने के दोषी माने जाते हैं।

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Shagun Chaurasia

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