Israel Beirut Attack: पश्चिम एशिया में शांति और कूटनीतिक समाधान की चर्चाओं के बीच एक बार फिर तनाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से क्षेत्र में तनाव कम करने और संभावित समझौते की कोशिशों की खबरों के बीच इजरायल ने लेबनान की राजधानी बेरूत में बड़ा सैन्य अभियान चलाया। हमले के बाद पूरे क्षेत्र में चिंता बढ़ गई है और ईरान ने भी इस कार्रवाई पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब क्षेत्र में कई मोर्चों पर बातचीत और तनाव कम करने के प्रयास जारी थे। ऐसे में बेरूत पर हमला शांति प्रक्रिया के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
बेरूत में क्या हुआ
रिपोर्टों के अनुसार, इजरायली सेना ने बेरूत और उसके आसपास के कुछ इलाकों को निशाना बनाकर हवाई हमले किए। इजरायल का दावा है कि उसका लक्ष्य उन ठिकानों को निशाना बनाना था जिनका संबंध उसके सुरक्षा हितों के लिए खतरा माने जाने वाले समूहों से था। हमलों के बाद कई इलाकों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। स्थानीय प्रशासन ने राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिए हैं, जबकि प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है।
इजरायल का क्या है पक्ष
इजरायली अधिकारियों का कहना है कि देश की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और यदि किसी भी तरह का खतरा महसूस होता है तो कार्रवाई करना उसका अधिकार है। इजरायल लंबे समय से लेबनान में सक्रिय सशस्त्र समूहों और ईरान समर्थित नेटवर्क को लेकर चिंता जताता रहा है। इजरायल का दावा है कि हाल के दिनों में उसकी सीमाओं और सुरक्षा प्रतिष्ठानों को लेकर खतरे बढ़े थे, जिसके चलते यह सैन्य कार्रवाई की गई।
बेरूत पर हमले के बाद ईरान ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। तेहरान का कहना है कि क्षेत्र में सैन्य कार्रवाई तनाव को और बढ़ाएगी तथा शांति प्रयासों को नुकसान पहुंचाएगी। ईरानी नेताओं ने इजरायल की कार्रवाई की आलोचना करते हुए इसे क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा बताया है। ईरान लंबे समय से लेबनान में अपने सहयोगी समूहों का समर्थन करता रहा है। यही वजह है कि बेरूत में हुई किसी भी बड़ी सैन्य कार्रवाई पर उसकी प्रतिक्रिया को महत्वपूर्ण माना जाता है।
ट्रंप की पीस डील पर क्यों उठ रहे सवाल
हाल के दिनों में अमेरिका की ओर से पश्चिम एशिया में तनाव कम करने और विभिन्न पक्षों के बीच समझौते की संभावनाओं को लेकर बयान सामने आए थे। माना जा रहा था कि कूटनीतिक प्रयासों के जरिए क्षेत्र में टकराव कम हो सकता है। लेकिन बेरूत पर हुए हमले के बाद यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या मौजूदा परिस्थितियों में किसी बड़े राजनीतिक समझौते या शांति पहल को आगे बढ़ाना आसान होगा। विश्लेषकों का कहना है कि जमीनी स्तर पर बढ़ती सैन्य गतिविधियां किसी भी शांति प्रक्रिया को जटिल बना सकती हैं।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय की बढ़ी चिंता
बेरूत पर हमले के बाद कई देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने संयम बरतने की अपील की है। कूटनीतिक हल और बातचीत के जरिए विवादों को सुलझाने पर जोर दिया जा रहा है। वैश्विक समुदाय की चिंता यह है कि यदि हालात नियंत्रण से बाहर हुए तो क्षेत्र में व्यापक संघर्ष की आशंका बढ़ सकती है।
बेरूत पर इजरायल की सैन्य कार्रवाई ने पश्चिम एशिया में चल रही शांति और कूटनीतिक कोशिशों पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। ईरान की तीखी प्रतिक्रिया और बढ़ते क्षेत्रीय तनाव ने स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है। फिलहाल दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि आने वाले दिनों में संबंधित पक्ष क्या कदम उठाते हैं और क्या कूटनीतिक प्रयास तनाव को कम करने में सफल हो पाते हैं।
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