Jharkhand : झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता की मांग को लेकर छात्र संगठन सड़कों पर हैं। इसी बीच छात्र नेताओं ने सरकार और प्रशासन पर आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश करने का आरोप लगाया है। छात्रों का कहना है कि भर्ती परीक्षाओं में हुई कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और योग्य अभ्यर्थियों के साथ न्याय किया जाना चाहिए। आंदोलन से जुड़े छात्र नेताओं का दावा है कि बड़ी संख्या में अभ्यर्थी अपनी मांगों को लेकर एकजुट हैं और जब तक स्पष्ट जवाब नहीं मिलता, तब तक विरोध जारी रहेगा।
‘एडमिट कार्ड दिखाने को तैयार हैं छात्र’
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे छात्र नेताओं में शामिल रवींद्र पासवान ने कहा कि प्रदर्शन में शामिल छात्र वास्तविक अभ्यर्थी हैं और जरूरत पड़ने पर वे अपने एडमिट कार्ड भी दिखा सकते हैं। उन्होंने कहा कि बिना किसी जांच और तथ्यात्मक पड़ताल के छात्रों पर सवाल उठाना उचित नहीं है। रवींद्र पासवान के अनुसार, आंदोलन का उद्देश्य केवल भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करना है, ताकि मेहनत करने वाले युवाओं के भविष्य के साथ किसी तरह का खिलवाड़ न हो।
अस्पताल में भी जारी है भूख हड़ताल
आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शामिल देवेंद्र नाथ महतो कई दिनों से भूख हड़ताल पर हैं। लगातार अनशन के कारण उनकी तबीयत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन उन्होंने अपना आंदोलन समाप्त करने से इनकार कर दिया है। देवेंद्र महतो का कहना है कि इलाज के दौरान भी उनका अनशन जारी है और जब तक छात्रों की मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया जाता, तब तक वे पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि हाल ही में हुए विधानसभा घेराव के दौरान शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ बल प्रयोग किया गया।
लाठीचार्ज की जांच की मांग
छात्र नेताओं ने 10 अगस्त को हुए प्रदर्शन के दौरान कथित लाठीचार्ज और धक्का-मुक्की की घटना की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने वाले छात्रों के साथ ऐसा व्यवहार नहीं होना चाहिए।
झारखंड में भर्ती परीक्षा को लेकर शुरू हुआ विवाद अब बड़े छात्र आंदोलन का रूप लेता दिख रहा है। एक ओर छात्र निष्पक्ष जांच और पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर आंदोलनकारी नेताओं का अनशन और विरोध प्रदर्शन लगातार जारी है। आने वाले दिनों में सरकार और छात्र संगठनों के बीच होने वाली बातचीत इस पूरे मामले की दिशा तय कर सकती है।
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