Wednesday, Aug 19

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जिन्ना की बीमारी का राज रखने वाले मुंबई के 2 पारसी डॉक्टरों को मिलेगा पाकिस्तानी सर्वोच्च सम्मान

Jinnah Parsi Doctors Nishan-e-Imtiaz: मुंबई के दो भारतीय पारसी डॉक्टरों को पाकिस्तान के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से एक निशान-ए-इम्तियाज देने के लिए नामित किया गया है। ये डॉक्टर हैं चिकित्सक डॉ. जल रतनजी पटेल और रेडियोलॉजिस्ट डॉ. जल धायभो-कू। पाकिस्तान के योजना मंत्री और अवॉर्ड समिति के प्रमुख अहसान इकबाल ने बताया कि दोनों ने 1947 में विभाजन से पहले मोहम्मद अली जिन्ना की गंभीर बीमारी की जानकारी सार्वजनिक नहीं होने दी थी। इकबाल के अनुसार, दोनों डॉक्टरों ने 1946 में जिन्ना की एक्स-रे जांच की थी और पाया था कि उनकी टीबी बेहद गंभीर अवस्था में पहुंच चुकी थी तथा उनके पास केवल एक-दो साल का समय बचा था। इसके बावजूद उन्होंने पेशेवर गोपनीयता बनाए रखी और यह जानकारी केवल जिन्ना के करीबी लोगों तक सीमित रही।

बीमारी का असर पड़ सकता था विभाजन पर

इतिहासकारों के मुताबिक, जिन्ना की खराब सेहत की जानकारी सामने आने पर भारत के विभाजन और पाकिस्तान के गठन का समय प्रभावित हो सकता था। अंतिम ब्रिटिश वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन ने भी बाद में कहा था कि बीमारी की गंभीरता पता होती तो वह विभाजन टाल सकते थे। इतिहासकार अकबर अहमद के अनुसार, जिन्ना 1930 के दशक से टीबी से पीड़ित थे और इसकी जानकारी कुछ करीबी लोगों, जिनमें उनकी बहन फातिमा जिन्ना भी शामिल थीं, को थी। उस दौर में टीबी बेहद घातक थी और प्रभावी एंटीबायोटिक इलाज उपलब्ध नहीं था। जिन्ना ने अपनी बीमारी की गंभीरता इसलिए छिपाई क्योंकि उन्हें अपनी राजनीतिक छवि और नेतृत्व पर असर पड़ने की आशंका थी। जिन्ना की हालत 1947 तक काफी बिगड़ चुकी थी। 11 सितंबर 1948 को फेफड़ों की टीबी से उनकी मौत हुई। दोनों डॉक्टरों को यह सम्मान उनकी मृत्यु के 78 साल बाद मार्च 2027 में मरणोपरांत दिया जाएगा।

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