Kailash Mansarovar Yatra 2026: कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026 एक बार फिर आस्था, साहस और आध्यात्मिक विश्वास का अद्भुत संगम बनकर सामने आई है। चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में स्थित पवित्र कैलाश पर्वत की परिक्रमा के लिए इस वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। मई से अब तक करीब 24,000 श्रद्धालु कैलाश पर्वत के दर्शन और परिक्रमा कर चुके हैं। यह संख्या पिछले वर्ष के लगभग 20,750 यात्रियों से अधिक है। यात्रा का यह चरण सितंबर तक जारी रहेगा।
पांच साल बाद लौटी रौनक
भारतीय श्रद्धालुओं के लिए कैलाश मानसरोवर यात्रा का महत्व केवल धार्मिक नहीं, बल्कि भावनात्मक भी है। लगभग पांच वर्षों के लंबे अंतराल के बाद भारतीय यात्रियों के लिए यह यात्रा दोबारा शुरू हुई, जिसके चलते इस बार श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है। देश के अलग-अलग राज्यों से लोग अपने परिवारों के साथ इस कठिन लेकिन पवित्र यात्रा का हिस्सा बन रहे हैं।
68 वर्षीय जुड़वां बहनों ने पूरा किया जीवन का सपना
बेंगलुरु की रहने वाली 68 वर्षीय जुड़वां बहनें जयंती गोपीनाथ और राजश्री शेषनाग के लिए यह यात्रा जीवन का सबसे बड़ा सपना थी। उन्होंने कई महीनों तक इस यात्रा की तैयारी की। दोनों रोजाना लगभग छह किलोमीटर पैदल चलती थीं और पांच किलोग्राम वजन वाला बैग लेकर अभ्यास करती थीं, ताकि ऊंचाई और कठिन रास्तों का सामना आसानी से कर सकें। उनके परिवार ने भी उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से मजबूत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। नियमित प्राणायाम, फिटनेस अभ्यास और लगातार हौसला बढ़ाने से दोनों बहनों ने इस चुनौतीपूर्ण यात्रा के लिए खुद को तैयार किया।
69 वर्ष की श्रद्धालु ने भी दिखाई अद्भुत इच्छाशक्ति
यात्रा दल की सबसे वरिष्ठ सदस्य 69 वर्षीय ललितम्मा भी इस यात्रा का हिस्सा बनीं। उन्होंने अपनी उम्र को आस्था के रास्ते में बाधा नहीं बनने दिया। कैलाश पर्वत के दर्शन और परिक्रमा करने का अवसर मिलने पर उन्होंने इसे अपने जीवन का सबसे यादगार अनुभव बताया।
पूरे परिवार ने निभाया साथ
इस यात्रा में केवल बुजुर्ग ही नहीं, बल्कि उनके बेटे-बेटियां, दामाद, बहुएं और अन्य परिजन भी शामिल हुए। परिवार के सभी सदस्य एक-दूसरे का मनोबल बढ़ाते हुए यात्रा पूरी कर रहे हैं। यह दृश्य बताता है कि कैलाश मानसरोवर यात्रा केवल व्यक्तिगत आस्था नहीं, बल्कि पारिवारिक और सांस्कृतिक विरासत का भी प्रतीक है।
क्यों मानी जाती है सबसे कठिन धार्मिक यात्राओं में से एक
कैलाश मानसरोवर यात्रा को दुनिया की सबसे कठिन धार्मिक यात्राओं में गिना जाता है। इसकी मुख्य वजहें हैं
समुद्र तल से अत्यधिक ऊंचाई
ऑक्सीजन की कमी
ऊबड़-खाबड़ और पथरीले रास्ते
तेजी से बदलता मौसम
कम तापमान और तेज हवाएं
इन परिस्थितियों में यात्रा पूरी करने के लिए श्रद्धालुओं को शारीरिक फिटनेस के साथ-साथ मजबूत मानसिक इच्छाशक्ति की भी आवश्यकता होती है।
हिंदू, बौद्ध और जैन धर्म में विशेष महत्व
कैलाश पर्वत हिंदू धर्म में भगवान शिव का निवास माना जाता है। वहीं, बौद्ध धर्म में इसे आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र और जैन धर्म में पहले तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव के निर्वाण स्थल से जुड़ा माना जाता है। यही कारण है कि हर वर्ष विभिन्न देशों से हजारों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।
सितंबर तक जारी रहेगी यात्रा
यात्रा अधिकारियों के अनुसार, कैलाश मानसरोवर यात्रा का मौजूदा सत्र सितंबर तक चलेगा। मौसम अनुकूल रहने पर आने वाले सप्ताहों में श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ने की संभावना है। प्रशासन यात्रियों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और यात्रा प्रबंधन के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं कर रहा है।
कैलाश मानसरोवर यात्रा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि श्रद्धा, धैर्य, अनुशासन और आत्मविश्वास की परीक्षा भी है। कठिन परिस्थितियों के बावजूद हजारों श्रद्धालुओं का उत्साह यह साबित करता है कि आस्था हर चुनौती से बड़ी होती है। पांच वर्षों के लंबे इंतजार के बाद भारतीय श्रद्धालुओं की बढ़ती भागीदारी ने इस पवित्र यात्रा को फिर से नई ऊर्जा और भव्यता प्रदान की है।
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