Khamenei Funeral Axis of Resistance: ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के अंतिम संस्कार को केवल धार्मिक या राजकीय समारोह के रूप में नहीं देखा जा रहा है। तेहरान में आयोजित इस कार्यक्रम ने यह संकेत देने की कोशिश की कि हालिया युद्धों और सैन्य दबाव के बावजूद ईरान का 'एक्सिस ऑफ रेसिस्टेंस' (Axis of Resistance) अब भी सक्रिय है। इस नेटवर्क में हमास, हिजबुल्लाह, हूती विद्रोही और इराक के ईरान समर्थित सशस्त्र गुट शामिल हैं।
समारोह में हमास, लेबनान के हिजबुल्लाह और यमन के हूती विद्रोहियों के प्रतिनिधिमंडलों की मौजूदगी सबसे अधिक चर्चा में रही। ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, इन प्रतिनिधियों ने विदेश मंत्री अब्बास अराघची से भी मुलाकात की। अमेरिका और कई पश्चिमी देश इन संगठनों को आतंकवादी संगठन घोषित कर चुके हैं, जबकि ईरान वर्षों से इन्हें समर्थन देता रहा है।
हिजबुल्लाह के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री मोहम्मद फ़नीश ने किया। इसमें संगठन के शहीद और घायल सदस्यों के परिजन भी शामिल थे। हमास की ओर से राजनीतिक ब्यूरो प्रमुख मोहम्मद दरविश के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल पहुंचा, जिसमें बासेम नईम भी शामिल थे। समारोह में इस्लामिक जिहाद के नेता ज़ियाद अल-नखाला और हूती संगठन के वरिष्ठ सदस्य ज़ैफ़ अल्लाह अल-शामी ने भी भाग लिया।
हाल के वर्षों में इज़रायल ने गाजा में हमास, लेबनान में हिजबुल्लाह और यमन में हूती नेटवर्क के खिलाफ कई सैन्य अभियान चलाए हैं। हालिया संघर्षों के बाद इज़रायल और अमेरिका ने दावा किया था कि ईरान समर्थित नेटवर्क को भारी नुकसान पहुंचा है। हालांकि अंतिम संस्कार में इन संगठनों की मौजूदगी को ईरान ने अपने क्षेत्रीय सहयोगियों के समर्थन के प्रदर्शन के रूप में पेश किया।
विश्लेषकों का मानना है कि हमास की मौजूदगी ने गाजा युद्ध के बावजूद उसके राजनीतिक ढांचे के सक्रिय रहने का संकेत दिया। हिजबुल्लाह की भागीदारी ने लेबनान मोर्चे पर उसकी मौजूदगी का संदेश दिया, जबकि हूती प्रतिनिधियों की उपस्थिति ने लाल सागर और समुद्री व्यापार मार्गों पर उनके प्रभाव की याद दिलाई।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह समारोह केवल श्रद्धांजलि तक सीमित नहीं था, बल्कि ईरान की ओर से एक भू-राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन भी था। इसके जरिए तेहरान ने यह संदेश देने की कोशिश की कि उसके सहयोगी संगठन पूरी तरह समाप्त नहीं हुए हैं। उनकी क्षमताओं को भले नुकसान पहुंचा हो, लेकिन उनका राजनीतिक अस्तित्व और क्षेत्रीय प्रभाव अब भी कायम है।
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