Kidney Health Tips: महाजन इमेजिंग एंड लैब्स की पैथोलॉजिस्ट और लैब डायरेक्टर डॉ. शेली महाजन के अनुसार, किडनी शरीर से विषैले पदार्थों को बाहर निकालने, तरल पदार्थों का संतुलन बनाए रखने, रक्तचाप नियंत्रित करने और खनिजों के स्तर को संतुलित रखने का काम करती है। हालांकि, किडनी की बीमारियां शुरुआती चरण में अक्सर बिना लक्षण के विकसित होती हैं।
भारत में डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, मोटापा और शारीरिक गतिविधि की कमी के कारण क्रॉनिक किडनी डिजीज के मामले बढ़ रहे हैं। समय पर पहचान न होने पर किडनी को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है।
1. संतुलित मात्रा में पानी पिएं
पर्याप्त पानी पीने से किडनी विषैले तत्वों को प्रभावी ढंग से बाहर निकाल पाती है और पथरी का खतरा कम होता है। हालांकि, अत्यधिक मीठे पेय जैसे सॉफ्ट ड्रिंक, एनर्जी ड्रिंक और पैकेज्ड जूस मोटापा व डायबिटीज का जोखिम बढ़ा सकते हैं। भारत जैसे गर्म देश में लंबे समय तक बाहर रहने, यात्रा करने या शारीरिक श्रम करने वालों को विशेष रूप से हाइड्रेशन का ध्यान रखना चाहिए।
2. डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर नियंत्रित रखें
डायबिटीज और हाइपरटेंशन दुनिया भर में किडनी रोग के प्रमुख कारण हैं। उच्च रक्त शर्करा किडनी की सूक्ष्म रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि उच्च रक्तचाप किडनी पर अतिरिक्त दबाव डालता है। नियमित व्यायाम, संतुलित आहार, कम नमक, प्रोसेस्ड फूड से दूरी और स्वस्थ वजन बनाए रखना मददगार है।
3. बिना सलाह के दवाएं लेने से बचें
सिरदर्द, मांसपेशियों या जोड़ों के दर्द के लिए दर्द निवारक दवाओं का बार-बार उपयोग किडनी को नुकसान पहुंचा सकता है, खासकर बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों में। हर्बल उत्पाद, सप्लीमेंट्स और वैकल्पिक उपचार भी किडनी पर अतिरिक्त दबाव डाल सकते हैं, इसलिए लंबे समय तक उपयोग से पहले डॉक्टर की सलाह जरूरी है।
4. नियमित जांच कराएं
डॉ. महाजन के अनुसार, समय रहते पहचान गंभीर किडनी रोगों से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है। नियमित ब्लड और यूरिन टेस्ट शुरुआती नुकसान का पता लगा सकते हैं। जरूरत पड़ने पर अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन और एमआरआई जैसी जांचें भी किडनी की संरचनात्मक समस्याओं की पहचान करने में मदद करती हैं।
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