Lakshya Raichandani: उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले से निकलकर भारतीय क्रिकेट में अपनी अलग पहचान बनाने वाले युवा बल्लेबाज लक्ष्य रायचंदानी आज देश के सबसे प्रतिभाशाली युवा खिलाड़ियों में गिने जा रहे हैं। महज 17 वर्ष की उम्र में वह भारतीय अंडर-19 टीम के उपकप्तान और शीर्ष क्रम के भरोसेमंद बल्लेबाज के रूप में अपनी छाप छोड़ चुके हैं। उनकी सफलता इस बात का प्रमाण है कि प्रतिभा, अनुशासन और निरंतर मेहनत के दम पर छोटे शहरों के खिलाड़ी भी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकते हैं।
गोंडा से शुरू हुआ क्रिकेट का सफर
लक्ष्य रायचंदानी का जन्म 15 अक्टूबर 2008 को हुआ। क्रिकेट के प्रति उनका लगाव बचपन से ही था और उन्होंने लगभग 10 वर्ष की उम्र में बल्ला थाम लिया था। परिवार की सामाजिक और राजनीतिक पृष्ठभूमि होने के बावजूद उन्होंने अपनी पहचान केवल क्रिकेट के मैदान पर प्रदर्शन के दम पर बनाई। घरेलू क्रिकेट में उत्तराखंड की ओर से खेलते हुए लक्ष्य ने अपनी तकनीकी बल्लेबाजी, धैर्य और लंबी पारियां खेलने की क्षमता से चयनकर्ताओं का ध्यान आकर्षित किया।
श्रीलंका दौरे पर यादगार प्रदर्शन
साल 2026 में श्रीलंका दौरे पर भारतीय अंडर-19 टीम के उपकप्तान के रूप में लक्ष्य रायचंदानी ने शानदार बल्लेबाजी की। गाले में खेले गए यूथ टेस्ट मैच में उन्होंने सागर विर्क के साथ पहले विकेट के लिए 295 रनों की रिकॉर्ड साझेदारी की, जो यूथ टेस्ट इतिहास की दूसरी सबसे बड़ी ओपनिंग साझेदारी मानी जा रही है। इसी मुकाबले में लक्ष्य ने 324 गेंदों में 207 रनों की धैर्यपूर्ण और शानदार पारी खेली, जिसमें 22 चौके और 3 छक्के शामिल रहे। यह उनके युवा करियर की सबसे यादगार पारियों में से एक रही। इसके बाद कोलंबो में खेले गए दूसरे यूथ टेस्ट की दूसरी पारी में भी उन्होंने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 116 गेंदों में नाबाद 100 रन बनाए और लगातार दूसरे टेस्ट में शतक लगाने का कारनामा किया।
वनडे और घरेलू क्रिकेट में भी दिखाया दम
श्रीलंका के खिलाफ यूथ वनडे श्रृंखला में भी लक्ष्य का बल्ला खूब चला। उन्होंने लगातार दो मैचों में 61 और 52 रन की उपयोगी पारियां खेलीं। वहीं रणजी ट्रॉफी 2025-26 सीजन में उत्तराखंड की ओर से खेलते हुए उन्होंने कई महत्वपूर्ण पारियां खेलीं। असम के खिलाफ 86 रन, त्रिपुरा के खिलाफ 65 रन और कर्नाटक के खिलाफ 55 रन बनाने के साथ एक विकेट भी अपने नाम किया।
तकनीकी रूप से मजबूत बल्लेबाज
दाएं हाथ के बल्लेबाज लक्ष्य रायचंदानी अपनी मजबूत तकनीक, धैर्य और परिस्थितियों के अनुसार बल्लेबाजी करने की क्षमता के लिए पहचाने जाते हैं। जरूरत पड़ने पर वह ऑफ ब्रेक गेंदबाजी भी करते हैं। क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि उनमें लंबी पारियां खेलने और दबाव में टीम को संभालने की विशेष क्षमता है।
सीनियर टीम की ओर बढ़ते कदम
लगातार बेहतरीन प्रदर्शन के दम पर लक्ष्य रायचंदानी को भारतीय क्रिकेट का उभरता सितारा माना जा रहा है। यदि उनका प्रदर्शन इसी तरह जारी रहता है, तो आने वाले वर्षों में उन्हें भारतीय सीनियर टीम में भी मौका मिल सकता है।
गोंडा से निकलकर भारतीय अंडर-19 टीम के उपकप्तान बनने तक का लक्ष्य रायचंदानी का सफर मेहनत, अनुशासन और समर्पण की मिसाल है। श्रीलंका दौरे पर दोहरा शतक, रिकॉर्ड साझेदारी और लगातार शानदार प्रदर्शन ने यह साबित कर दिया है कि वह भारतीय क्रिकेट के भविष्य के सबसे प्रतिभाशाली बल्लेबाजों में से एक हैं। अब क्रिकेट प्रेमियों की नजर उनके अगले बड़े कदम और सीनियर टीम तक पहुंचने के सफर पर टिकी है।
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