Laxmi Jayanti 2026: सनातन धर्म में माता लक्ष्मी को धन, वैभव और समृद्धि की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है। मान्यता है कि जिन घरों पर मां लक्ष्मी की कृपा होती है, वहां सुख-समृद्धि का वास रहता है और आर्थिक संकट दूर हो जाते हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि पर देवी लक्ष्मी का प्राकट्य हुआ था। इसी कारण इस दिन को लक्ष्मी जयंती के रूप में मनाया जाता है।
धार्मिक विश्वास है कि इस पावन तिथि पर विधिपूर्वक पूजा-अर्चना करने से परिवार में सुख, शांति और ऐश्वर्य की वृद्धि होती है। आइए जानते हैं इस वर्ष लक्ष्मी जयंती की तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि।
द्रिक पंचांग के अनुसार, फाल्गुन पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 2 मार्च 2026 को शाम 5:55 बजे से होगी और इसका समापन 3 मार्च 2026 को शाम 5:07 बजे होगा। उदया तिथि के आधार पर 3 मार्च 2026 को फाल्गुन पूर्णिमा मनाई जाएगी और इसी दिन लक्ष्मी जयंती भी मनाई जाएगी। इसी दिन होलिका दहन और चंद्र ग्रहण का भी संयोग रहेगा।
सूर्योदय: सुबह 5:35 बजे
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 5:13 बजे से 6:01 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:02 बजे से 11:49 बजे तक
सायंकाल संध्या मुहूर्त: शाम 5:16 बजे से 6:30 बजे तक
इन शुभ मुहूर्तों में पूजा करना विशेष फलदायी माना जाता है।
प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ या पीले वस्त्र धारण करें।
मां लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र के समक्ष घी का दीपक जलाएं।
देवी को लाल पुष्प, इत्र, फल, वस्त्र और श्रृंगार सामग्री अर्पित करें।
लक्ष्मी मंत्र, लक्ष्मी चालीसा और श्री सूक्त का पाठ करें।
अंत में आरती कर प्रसाद वितरित करें।
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