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Atal Bihari Vajpayee 101th Birthday: भारत रत्न और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की 101वीं जयंती इस वर्ष 25 दिसंबर 2025 को सुशासन दिवस के रूप में मनाई जा रही है। अटल जी का व्यक्तित्व किसी साधारण नेता से कहीं अधिक था। वे न केवल सियासी दृष्टिकोण से दूरदर्शी थे, बल्कि कवि, वक्ता और देशभक्त के रूप में भी अद्वितीय स्थान रखते थे। उनके जन्मदिन पर देशभर में सुशासन की शपथ दिलवाई जाती है और उनके विचारों, कविताओं और योगदान को याद किया जाता है।
सुशासन का मतलब केवल प्रशासनिक दक्षता नहीं है। यह उन मूल्यों और प्रणालियों का मिश्रण है जिनके माध्यम से सरकार अपने नागरिकों की सेवा करती है, सार्वजनिक संसाधनों का न्यायसंगत प्रबंधन करती है और मानवाधिकारों तथा विधि सम्मत शासन को सुनिश्चित करती है। विश्व बैंक इसे ‘देश के आर्थिक और सामाजिक संसाधनों के प्रबंधन में शक्ति का प्रयोग’ और प्रभावी नीतियों को कार्यान्वित करने की प्रक्रिया के रूप में परिभाषित करता है। अटल जी हमेशा यह मानते थे कि सुशासन देश की प्रगति और विश्वसनीयता का आधार है।
अटल जी का मानना था, “हम केवल अपने लिए नहीं, औरों के लिए भी जीएं। यदि भारत सुसंपन्न होगा तो दुनिया में उसका सम्मान बढ़ेगा। गरीबी और दरिद्रता विवशता हैं, संतोष नहीं।” उनके विचारों में राष्ट्रप्रेम, त्याग और न्याय की भावना साफ झलकती है। वे कहते थे, “हे प्रभु! मुझे इतनी ऊंचाई कभी मत देना कि मैं दूसरों को गले न लगा सकूँ।" उनके लिए सत्ता केवल सेवा का माध्यम थी, शक्ति का उद्देश्य नहीं।
अटल जी एक प्रखर कवि भी थे। उनकी कविता “गीत नया गाता हूँ” जीवन की चुनौतियों, संघर्ष और दृढ़ संकल्प की प्रेरणा देती है। इसमें टूटे हुए सपनों के बावजूद संघर्ष, उम्मीद और हौसले की भावनाओं को दर्शाया गया है। उनकी कविताओं में जीवन की सच्चाई, मानव अनुभव और नैतिक मूल्य स्पष्ट रूप से प्रकट होते हैं। उनके शब्द आज भी समाज और राजनीति के लिए मार्गदर्शक हैं।
अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म 25 दिसंबर 1924 को मध्य प्रदेश के ग्वालियर में कृष्ण बिहारी वाजपेयी और कृष्णा देवी के घर हुआ। शिक्षा उन्होंने ग्वालियर के विक्टोरिया कॉलेज (अब लक्ष्मीबाई कॉलेज) और कानपुर के डीएवी कॉलेज से प्राप्त की। राजनीति और साहित्य दोनों में ही उनका योगदान उल्लेखनीय रहा। वे 1957 से संसद सदस्य रहे और तीन बार प्रधानमंत्री बनने वाले पहले नेता बन गए। उनके प्रधानमंत्री कार्यकाल में भारत ने सफल परमाणु परीक्षण किए और विदेश नीति में मजबूती हासिल की।
वाजपेयी जी ने न केवल राजनीति में बल्कि साहित्यिक जगत में भी अपना योगदान दिया। उन्होंने मासिक पत्रिका राष्ट्रधर्म, हिंदी साप्ताहिक पाञ्चजन्य, और समाचारपत्र स्वदेश तथा वीर अर्जुन का संपादन किया। उनकी प्रमुख पुस्तकें जैसे मेरी संसदीय यात्रा, मेरी इक्यावन कविताएं, संकल्प काल, शक्ति से शांति और फोर डीकेड्स इन पार्लियामेंट 1957-95 आज भी राजनीतिक और साहित्यिक अध्ययन का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
राष्ट्र के प्रति सेवाओं और योगदान के लिए अटल जी को 1992 में पद्म विभूषण, 2014 में भारत रत्न और कई अन्य प्रतिष्ठित पुरस्कार प्राप्त हुए। वे लोकसभा और राज्यसभा में कई बार निर्वाचित हुए और संसद में अपने विचारों, भाषणों और नीति निर्धारण के लिए जाने जाते रहे।
अटल बिहारी वाजपेयी का निधन 16 अगस्त 2018 को हुआ, लेकिन उनका राजनीतिक दर्शन, कविताएँ और नैतिक संदेश आज भी जीवित हैं। वे हमें यह याद दिलाते हैं कि देश सेवा, नैतिकता और दृढ़ संकल्प किसी भी चुनौती को पार कर सकते हैं। उनकी कविताओं और भाषणों में संघर्ष और उम्मीद की प्रेरणा सदैव बनी रहती है।
इस सुशासन दिवस 2025 पर देशभर में उनके विचारों, कविताओं और आदर्शों को याद कर, हम सभी न केवल अटल जी के योगदान को सम्मानित करते हैं, बल्कि अपने देश को बेहतर और सुशासित बनाने की प्रेरणा भी लेते हैं।
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