Leptospirosis Monsoon Alert: मानसून के दौरान सड़कों पर जमा पानी सिर्फ बारिश का नहीं होता, बल्कि इसमें सीवेज, कचरा, पशुओं का मल-मूत्र, औद्योगिक रसायन और अन्य हानिकारक पदार्थ भी मिल जाते हैं। ऐसे पानी में चलना स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। इसी को देखते हुए बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने मुंबईवासियों के लिए लेप्टोस्पायरोसिस को लेकर स्वास्थ्य चेतावनी जारी की है और लोगों से जलभराव वाले पानी में चलने से बचने की अपील की है।
क्या है लेप्टोस्पायरोसिस?
मुंबई के सैफी अस्पताल के आपातकालीन विभाग के प्रमुख डॉ. मुर्तज़ा एस. बगवाला के अनुसार, लेप्टोस्पायरोसिस एक बैक्टीरियल संक्रमण है, जो संक्रमित जानवरों, खासकर चूहों के मूत्र से दूषित पानी के संपर्क में आने से फैलता है। भारी बारिश और बाढ़ के बाद शहरों में इसका खतरा बढ़ जाता है।
उन्होंने बताया कि शुरुआत में इसके लक्षण सामान्य वायरल संक्रमण जैसे लगते हैं, इसलिए लोग इन्हें नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन समय पर इलाज न मिलने पर यह संक्रमण किडनी, लिवर, फेफड़ों और अन्य अंगों को प्रभावित कर सकता है और जानलेवा भी साबित हो सकता है।
ये लक्षण दिखें तो तुरंत सतर्क हों
डॉ. बगवाला के मुताबिक, लेप्टोस्पायरोसिस के शुरुआती लक्षण हैं:
- तेज बुखार
- पिंडलियों और कमर में तेज मांसपेशियों का दर्द
- तेज सिरदर्द
- ठंड लगना
- उल्टी, मतली और दस्त
- आंखों का लाल होना
- पीलिया या त्वचा पर चकत्ते
BMC ने बताए जोखिम के स्तर
- कम जोखिम: जिनके शरीर पर कोई कट या घाव नहीं था और वे एक बार जलभराव वाले पानी से गुजरे।
- मध्यम जोखिम: जिनके पैरों या टांगों पर छोटे कट या घाव थे और वे ऐसे पानी में चले।
- उच्च जोखिम: सफाईकर्मी, रेस्क्यू वर्कर या ऐसे लोग जो लंबे समय तक या बार-बार दूषित पानी के संपर्क में रहे।
BMC ने 72 घंटे की 'गोल्डन विंडो' पर भी जोर दिया है। यदि कोई व्यक्ति बाढ़ या जलभराव वाले पानी के संपर्क में आया है, तो उसे 24 से 72 घंटे के भीतर डॉक्टर से सलाह लेकर बचाव संबंधी दवा शुरू कर देनी चाहिए। इस अवधि में इलाज शुरू होने पर बैक्टीरिया को शरीर में बढ़ने और महत्वपूर्ण अंगों को नुकसान पहुंचाने से पहले ही रोका जा सकता है।
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