Lohri 2026
Lohri 2026: देशभर में मंगलवार, 13 जनवरी 2026 को लोहड़ी का पर्व पूरे उत्साह और उमंग के साथ मनाया जा रहा है। खासतौर पर पंजाब और उत्तर भारत से जुड़ा यह लोकपर्व अब सीमाओं से बाहर निकलकर पूरे भारत में खुशियों का प्रतीक बन चुका है। लोहड़ी सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि नई शुरुआत, उम्मीद और सामूहिक उल्लास का उत्सव है।
लोहड़ी की शाम होते ही घर-घर और मोहल्लों में अलाव जलाए जाते हैं। लोग परिवार और दोस्तों के साथ अग्नि के चारों ओर परिक्रमा करते हैं और उसमें तिल, गुड़, मूंगफली, गज्जक और मक्के के दाने अर्पित करते हैं। यह परंपरा प्रकृति के प्रति आभार जताने और सुख-समृद्धि की कामना का प्रतीक मानी जाती है। ठंड के मौसम के विदा होने और रबी फसल की कटाई के स्वागत के रूप में लोहड़ी का खास महत्व है।
इस दिन बच्चों की टोलियां पारंपरिक लोकगीत ‘सुंदर-मुंदरिए’ गाते हुए घर-घर जाती हैं। बदले में उन्हें मिठाइयां, पैसे और आशीर्वाद दिए जाते हैं। मान्यता है कि लोहड़ी की पवित्र अग्नि जीवन से नकारात्मकता, दुख और परेशानियों को भस्म कर देती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है। पंजाबी संस्कृति में लोहड़ी को सामाजिक एकता, खुशहाली और सुरक्षा का पर्व माना जाता है। यह त्योहार लोगों को जोड़ता है और सामूहिक रूप से खुशियां बांटने का संदेश देता है। आज के डिजिटल दौर में भी लोग सोशल मीडिया और मैसेज के जरिए एक-दूसरे को लोहड़ी की शुभकामनाएं भेजते हैं।
“लोहड़ी की आग में जल जाएं सारे ग़म, और जीवन में भर जाए खुशियों की रौशनी।”
इस लोहड़ी, परंपरा, उल्लास और अपनापन तीनों को साथ लेकर नए साल की ओर बढ़ें।
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